गौ रक्षा और सेवा भारतीय संस्कृति, धर्म का मूल आधार है: आचार्य

कम्युनिटी रिपोर्टर | दुर्ग गोविंद गौ एवं जीव सेवा संस्थान, पंचगव्य अनुसंधान केंद्र मोहलाई के गौ-सिद्ध कार्यकर्ताओं ने महाशिवरात्रि पर्व पर ग्राम मोहलाई में गौ वंश की रक्षा और उसके महत्व पर आधारित गौ विज्ञान, स्वास्थ्य कथा एवं पंचगव्य चिकित्सा परामर्श शिविर आयोजित किया गया, जिसमें पंचगव्य चिकित्सा पद्धति के संस्थापक एवं पंचगव्य गुरुकुलम कांचीपुरम (तमिलनाडु) के कुलपति आचार्य डॉ.निरंजन वर्मा गुरुजी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि गौ रक्षा और सेवा भारतीय संस्कृति, धर्म और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मूल आधार है। गाय के दूध, दही, घी, गोबर, और गौमूत्र से निर्मित पंचगव्य स्वास्थ्यवर्धक, रोगाणुनाशक और कृषि के लिए उत्कृष्ट जैविक खाद है। यह न केवल मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति देता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर शरीर को स्वस्थ और दीर्घायु बनाता है। इस दौरान स्वास्थ्य शिविर की कक्षा भी लगाई गई, जिसमें लोगों ने प्रश्नोत्तरी कक्षा के दौरान विभिन्न रोगों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं पर उन्हें परामर्श और मार्गदर्शन भी मिला। शिविर मे गौ-सिद्ध डॉ. एसोसिएशन के सदस्य, गौशाला परिवार, ग्रामीण सहित गायत्री परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। गायत्री परिवार, छग युवा प्रकोष्ठ के प्रांतीय संयोजक ओमप्रकाश राठौर ने गौ वंश की वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डाला। अंत में नारी जागरण आंदोलन प्रमुख डॉ. कुंती साहू ने भी गौ वंश की सुरक्षा और महत्व पर प्रकाश डाला। सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया। विधायक ललित चंद्राकर, गायत्री परिवार उपजोन समन्वयक एसपी सिंग, रोमलाल, टीकम चंद्राकर, गौशाला प्रमुख मनीषा यादव उपस्थित थे।

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