भास्कर संवाददाता|बांसवाड़ा िचकित्सा और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक शुक्रवार को जिला प्रमुख रेशम मालवीया ने ली। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने मेडिकल ऑफिसर व प्रभारी को चिकित्सा सुविधाओं के प्रस्ताव बनाकर सीएमएचओ के माध्यम से जिला परिषद को भेजने को कहा। ताकि वे मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री के सामने इन प्रस्तावों को रखकर पूरा कराने का प्रयास करेंगे। बीसीएमएचओ मुख्यालय पर मोर्चरी शुरू करवाने के लिए स्थानीय विधायक को प्रस्ताव भेजने को कहा। जिला प्रमुख ने आयुष्मान आरोग्य योजना, मां वाउचर योजना, परिवार कल्याण, एनसीडी, नि:शुल्क दवा वितरण, सिकलसेल एनीमिया, टीबी, शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। सीएमएचओ डॉ. एचएल तााबियार ने जिले के उन 11 सब सेंटर की जानकारी दी, जहां भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस पर बीसीएमओ ने विशेषकर अतिक्रमण, दलदल जमीन, गांव से दूर होने की समस्या बताई। जिला प्रमुख ने उचित समाधान के लिए एसडीएम और कलेक्टर को इससे अवगत कराकर उचित समाधान कराने की कहा। अतिरिक्त सीएमएचओ डॉ. भरतराम मीणा ने लोधा या डांगपाड़ा क्षेत्र में एक प्राथमिक स्वास्थ्य शुरू करने का सुझाव दिया। बताया कि इस क्षेत्र में मिल वर्कर अधिकांश संख्या में निवास करते हैं। यहां एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुल जाता है तो हजारों लोगों को राहत मिलेगी। जिला प्रमुख ने विधायक के माध्यम से प्रस्ताव रखने के निर्देश दिए। बैठक में आरसीएचओ डॉ. दिनेश कुमार भाबोर, डीपीसी डॉ. प्रवीण गुप्ता, बीसीएमओ डॉ. मुकेश मईड़ा, डॉ. भगत सिंह तंबोलिया, डॉ प्रवीण लबाना, डॉ. भीमसिंह, डॉ. देवेंद्र डामोर, डॉ. दीपक पंकज, डॉ. दीपिका रोत, बीपीओ पुष्पेंद्र सिंह मौजूद रहे। मरीजों की जांच के लिए डॉक्टर्स समय दें, बंगाली अपने आप ही भाग जाएंगे जिला प्रमुख रेशम ने कहा कि चिकित्सकों के व्यवहार को लेकर शिकायतें मिलती है। चिकित्सक स्थानीय भाषा में बात करें और मरीज को समय दे। अस्पताल को एक ब्रांड के रूप में प्रस्तुत करें। इससे लोग बंगाली के पास भी जाना बंद कर देंगे। ऐसे में बंगाली झोलाछाप अपने आप ही भाग जाएंगे। लेकिन इसके लिए हमें आमजन को हाई क्वालिटी की सुविधाएं देनी होगी। उन्होंने अस्पतालों में साफ-सफाई में विशेषकर शौचालय की स्थिति को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की। सीएमएचओ ने जिला प्रमुख को बताया कि जिले में हर माह 4000 औसतन प्रसव हो रहे हैं। जिसमें से कई संस्थान तो ऐसे हैं जो स्वयं ही हर माह 200-200 औसत प्रसव करा रहे हैं। जिला प्रमुख ने कहा कि कुछ समय पहले बांसवाड़ा स्वास्थ्य मुद्दों को लेकर अंतिम पायदान पर रहता था, लेकिन अब यहां स्थितियां बदल चुकी है। हमारे अधिकांश डॉक्टर्स स्थानीय क्षेत्र के है। इसका फायदा आमजनता को मिल रहा है। जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार हो रहा है।


