बालोद| जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई घरों और मोहल्लों में पारंपरिक कुएं मौजूद हैं, जो वर्षों से पेयजल और घरेलू उपयोग का प्रमुख स्रोत रहे हैं। इन कुओं का संरक्षण और नियमित साफ-सफाई आवश्यक है। शहरों में स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर पुराने कुओं को या तो पाट दिया गया है या फिर उन्हें कचरा डालने का स्थान बना दिया गया है। इससे न केवल पारंपरिक जलस्रोत खत्म हो रहे हैं। -विशाल सागर, बालोद


