ग्राम सेमरा के ग्राम सचिव रहते हैं नदारद, ग्रामीणों का आरोप विकास हो रहा बाधित
अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की ग्राम पंचायत सेमरा में प्रशासनिक लापरवाही चरम पर है। यहां के पंचायत सचिव महीनों से पंचायत कार्यालय से नदारद हैं। गांव के लोगों के लिए सचिव साहब का दीदार करना किसी व्हाइट टाइगर को देखने जैसा दुर्लभ अनुभव बन चुका है। ग्राम वासी लंबे समय से सचिव की अनुपस्थिति के कारण शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।
जनता परेशान, अधिकारी बेपरवाह
ग्रामीणों का कहना है कि सचिव न तो समय पर पंचायत कार्यालय आते हैं और न ही फोन कॉल का जवाब देते हैं। एक बार फोन उठाने के बाद वह दोबारा कॉल रिसीव नहीं करते, क्योंकि उन्हें पता होता है कि अब ग्रामीण अपने हक की बात करेंगे। सवाल यह है कि क्या सचिव साहब को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई?
जनपद की मीटिंग का बहाना
जब कभी कोई हितग्राही या पत्रकार सचिव से संपर्क करता है तो जवाब मिलता है मैं अभी जनपद कार्यालय की मीटिंग में हूं।ष् हैरानी की बात है कि सचिव साहब पंचायत से ज्यादा जनपद कार्यालय में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। क्या वास्तव में इतनी लगातार मीटिंग होती हैं या यह सिर्फ कार्यालय न आने का बहाना है?
सहायक सचिव की चुप्पी पर भी सवाल
सचिव की गैरमौजूदगी में सहायक सचिव से उम्मीद थी कि वे कम से कम जनता की बात सुनें और आवेदन रिसीव करें। लेकिन सहायक सचिव सिर्फ कार्यालय में मौजूद रहते हैं, काम करने से बचते हैं। आवेदन लेने के नाम पर सचिव का हवाला दे देते हैं। चर्चा है कि सहायक सचिव साहब वर्षों से सेमरा पंचायत में पदस्थ हैं और हर भ्रष्टाचार में उनकी भूमिका अहम रही है। शायद यही कारण है कि वे भी शिकायतों पर आंख मूंदे बैठे हैं। गांव के लोगों ने मांग की है कि इस लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैये पर कड़ी कार्रवाई की जाए। पंचायत कार्यालय की नियमित जांच हो, सचिव की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और सहायक सचिव की भूमिका की भी गहन जांच हो। क्या ग्राम पंचायत सेमरा में जनता को उनका हक मिलेगा या फिर सचिव-सहायक सचिव की जोड़ी यूं ही ‘मलाई’ खाती रहेगी? यह सवाल अब अनूपपुर जिले की प्रशासनिक ईमानदारी पर खड़ा है।
इनका कहना है कि
मैं जनपद पंचायत के सीईओ को बोलता हूं
तन्मय वशिष्ठ शर्मा
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अनूपपुर


