भास्कर न्यूज | जालंधर जनवरी में शीर्ष सर्दी और फरवरी की शुरुआत में पौधे निद्रा में रहे हैं। अब बसंती मौसम में हर पौधा खिला हुआ है। आगामी मार्च महीना अब घर के बगीचों में सब्जियों के पौधे रोपने का है। अब घरों की छतों पर वजन में हलके ग्रो बैग्स में सब्जियां लगाने का शौक जालंधरियों में तेजी से बढ़ा है। रोजाना की भागमभाग के बीच तनाव से मुिक्त के लिए लोग छतों पर बगीचे बना रहे हैं। अर्बन फार्मिंग के माहिर हर्ब-लिस्ट रौशन लाल शर्मा और जतिन गुप्ता ने बताया कि मार्च का महीना घरों में बगीचा बनाने की शुरुआत के लिए आदर्श है। फरवरी के बचे दिनों में 15×15 इंच के ग्रो बैग तैयार करें। इसमें सही तरीके से मिट्टी डालें। फिर मार्च के पहले हफ्ते में पौधे लगाएं। उन्होंने बताया कि घर के बगीचे में केमिकल मुक्त खेती संभव है। पौधों के रोगों का उपचार नीम के तेल-लहसुन-पुरानी लस्सी से हो जाता है। जो सब्जी इस बगीचे में लगेगी, उसका स्वाद बिल्कुल वैसा मिलेगा जैसा बचपन में महसूस किया करते थे। पौधों की खुराक बीज भिगोकर लगाएं: लौकी, तोरई और करेले के बीजों को लगाने से पहले 12-24 घंटे पानी में भिगो दें, इससे वे 2-3 दिन जल्दी अंकुरित होते हैं। तरल खाद : हर 15 दिन में जीवामृत या गोबर की खाद को पानी में घोलकर डालें। धूप तेज होने के बाद जरूरत के हिसाब से दोपहर 12 से 3 बजे के बीच पौधों पर ग्रीन नेट लगा दें। बागबानी से तनाव से मुक्ति और कसरत दफ्तर में माल्टीटास्किंग के दौर में खुद के लिए समय आरक्षित करना जरूरी है जो मोबाइल फोन व कंप्यूटर से दूर हो। अर्बन फार्मिंग माहिर डॉ. नरेश गुलाटी कहते हैं कि बागबानी सिर्फ पौधों को पानी देना नहीं है, यह एक शारीरिक और मानसिक व्यायाम है। गुड़ाई करना और पौधों की छंटाई करना आपके शरीर को सक्रिय रखता है। जब आप अपने लगाए हुए बीज को छोटा पौधा बनते देखते हैं, तो वह उपलब्धि की भावना देता है। ग्रो बैग ऐसे तैयार करें . 50% मिट्टी 30% खाद 20% कोकोपीट का मिश्रण बनाकर पोट मिक्स तैयार करें। . कम से कम 6-7 घंटे की धूप जरूरी है। . मई की लू से बचाने के लिए मिट्टी के ऊपर सूखी घास या पत्तों की परत बिछा दें। सुनिश्चित करें कि ग्रो बैग के नीचे छेद हों ताकि फालतू पानी निकल जाए। ये सब्जियां उगाएं : भिंडी, लौकी, तोरई, करेला, खीरा और ग्वार फली के अलावा हरा धनिया और पुदीना। इसी के साथ मिर्च और टमाटर, बेंगन, लहसुन भी लगा सकते हैं।


