ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी जो आंखों की रोशनी को धीरे-धीरे कम कर देती हैं: डॉ. राजगुरु

भास्कर न्यूज | बाड़मेर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं संबद्ध राजकीय चिकित्सालय बाड़मेर में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह का शुभारंभ चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. बीएल मंसूरिया की अध्यक्षता में किया गया। इस सप्ताह को मनाने का उद्देश्य ग्लूकोमा के बारे में जागरूकता पैदा करना और लोगों को इस खतरनाक बीमारी के बारे में अवगत कराना है। इस अवसर पर वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शक्ति राजगुरु ने बताया कि ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है, जो आंखों की रोशनी को धीरे-धीरे कम कर देती हैं। यह बीमारी आंखों के अंदरूनी दबाव के बढ़ने से होती है, जिससे ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान पहुंचता हैं। उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा के शुरुआती चरणों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते है। लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, व्यक्ति को देखने में परेशानी होने लगती है। ग्लूकोमा का इलाज आंखों के दबाव को कम करने पर केंद्रित होता है। नेत्र विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. के आर चौधरी ने आमजन को समझाया कि ग्लूकोमा से बचाव के लिए नियमित आंखों की जांच करवाना बेहद जरूरी है। इसके अलाव अपने आहार में परिवर्तन करके और नियमित व्यायाम करके भी ग्लूकोमा के खतरे को कम कर सकते हैं। नेत्र विभाग ओटी प्रभारी एवं नर्सिंग ऑफिसर वीराराम माली, ओपीडी प्रभारी व नेत्र सहायक विक्रम सोलंकी एवं नेत्र सहायक मनखुश मीणा ने इस विश्व ग्लूकोमा सप्ताह पर ग्लूकोमा के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को इस खतरनाक बीमारी के बारे में बारीकी से जानकारी दी। ओपीडी में आने वाले 40 साल के ऊपर सभी मरीजों के आंख के प्रेशर की जांच करके उचित सलाह देकर अन्य विभाग में भी ग्लूकोमा संदेह मरीजों को चयनित करके जांच तथा जागरूकता फैलाने का कार्य किया।। इस दौरान डॉ. गोपाल चौधरी, डॉ. गिरीश कुमार, डॉ. लोकेंद्र सिंह मौजूद रहे।

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