ग्वालियर में जीवाजी विश्वविद्यालय हमेशा से गड़बड़ी और फर्जीवाड़े के लिए चर्चित रहा है। चाहे वह फर्जी मार्कशीट का मसला हो या ऐसे कॉलेज को संबद्धता देने का, जिसका अस्तित्व ही नहीं हो। अब जीवाजी विश्वविद्यालय (JU) में ‘नंबर स्कैम’ सामने आया है। यहां फेल छात्र की ओएमआर शीट में टेंपरिंग कर बढ़े हुए नंबर देकर पास करा दिया जाता है। हाल ही में एम.एससी. माइक्रोबायोलॉजी थर्ड सेमेस्टर के एक छात्र की मार्कशीट से जेयू में हंगामा मचा हुआ है। दरअसल दिसंबर में हुई इस परीक्षा में छात्र को मूल्यांकन करने वाले प्रोफेसर ने सिर्फ 02 नंबर दिए थे। साथ ही कॉपी पर ‘बकवास’ शब्द भी लिखा था, क्योंकि छात्र ने कुछ नहीं लिखा था। जब मार्कशीट आई तो उस विषय में छात्र को 32 अंक मिले थे और वह फेल से पास हो गया था। इस केस की गोपनीय शिकायत हुई, जिसके बाद जांच की गई। एक जांच समिति बनाई गई। समिति को बड़ी गड़बड़ी की जांच करनी थी, लेकिन समिति ने सिर्फ इस सिंगल केस को फाइनल कर जांच खत्म कर दी। दिसंबर 2025 में हुई थी एम.एससी. थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा जीवाजी विश्वविद्यालय के अधीन शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय में एम.एससी. थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा दिसंबर 2025 में हुई थी। इसमें एक छात्र आकाश ने भी परीक्षा दी थी। वह एम.एससी. माइक्रोबायोलॉजी कर रहा था। उसने दिसंबर में विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी की परीक्षा दी थी, जिसमें उसने कुछ भी नहीं लिखा था। सिर्फ दो सवालों में इतना लिखा था कि उसे दो अलग-अलग सवालों के जवाब में केवल 01-01 अंक मिले थे मूल्यांकनकर्ता ने कॉपी पर ‘बकवास’ तक लिखा था छात्र की कॉपी इतनी खराब थी कि कॉपी का मूल्यांकन करने वाले ने उसे बहुत कम नंबर दिए थे। इतना ही नहीं, सवालों के जवाब में कोई तालमेल नहीं होने पर शून्य अंक देते हुए नीचे “बकवास” शब्द तक लिखा था। कुल मिलाकर छात्र को सीधे तौर पर फेल कर दिया गया था। मार्कशीट आई तो फेल परीक्षार्थी हो गया पास जब फरवरी 2026 में अंकसूची आई तो उसमें उसे 32 अंक देकर पास कर दिया गया था। यह बात किसी की नजर में आ गई और उसने तथ्यों के साथ जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन से गोपनीय शिकायत की। प्रबंधन ने शिकायत के आधार पर कॉपी और ओएमआर शीट मंगवाकर जांच करवाई तो पता चला कि कॉपी में मूल्यांकनकर्ता ने 2 ही अंक दिए थे, जबकि ओएमआर शीट में इसी पेपर में 32 अंक दर्ज थे। ओएमआर शीट में टेंपरिंग कर 02 को बनाया गया 32 इस मामले की जांच समिति से कराई गई है। जांच में यह भी सामने आया कि ओएमआर शीट में टेंपरिंग की गई है। इसमें 02 के 0 को ब्लेड से खुरचा गया और उसके स्थान पर 3 लिखकर 32 कर दिया गया। इससे फेल छात्र को पास करा दिया गया। समिति की रिपोर्ट में ओएमआर शीट में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। जल्द ही इसमें बड़ा एक्शन हो सकता है। मार्कशीट बनाने वाली कंपनी ओएमआर शीट से बनाती है अंकसूची यह ओएमआर शीट ही परिणाम तैयार करने वाली कंपनी के पास पहुंचती है। यही अंकसूची बनाने का आधार होती है। जिस कंपनी ने यह मार्कशीट बनाई है, उसने ओएमआर शीट से स्कैन कर अंक अंकसूची में भरकर परिणाम तैयार किया। बड़ा है टेंपरिंग का खेल, सिर्फ एक केस पर खत्म किया जीवाजी विश्वविद्यालय की विभिन्न परीक्षाओं में अंकों की गड़बड़ी पहले भी सामने आती रही है। हाल ही में बीएससी प्रथम वर्ष की पूरक परीक्षा में भी विद्यार्थियों ने अंकों में गड़बड़ी की शिकायत की थी, जिसके बाद सुधार किया गया था। लेकिन इस बार जो गड़बड़ी पकड़ी गई है, उसमें कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से ओएमआर शीट में टेंपरिंग कर हेरफेर किया गया है। आशंका है कि इस तरह की गड़बड़ी बड़े स्तर पर हुई है। मामला सामने आने के बाद जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अन्य कॉपियां और ओएमआर शीट जांचने के लिए समिति बनाई थी, लेकिन समिति ने बचने के लिए सिर्फ इसी एक केस की जांच कर अंतिम रिपोर्ट दे दी, जिससे बड़ा नंबर स्कैम दबा दिया गया। जांच का दायरा बढ़ता तो बड़ा घोटाला सामने आता इस गड़बड़ी को सामने लाने वाले सूत्रों का कहना है कि यह तो एक कॉपी में गड़बड़ी सामने आई है। अन्य कॉपियां भी अच्छी तरह से चेक की जाएं तो उनमें भी गड़बड़ी सामने आ सकती है। अंकों में बदलाव का यह रैकेट परीक्षा भवन में तैनात कुछ कर्मचारी और बाहरी लोग मिलकर संचालित कर रहे हैं। यदि निष्पक्ष और विस्तृत जांच हो जाए तो कई लोग सामने आ सकते हैं।


