सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड क्षेत्र के बागड़ी में दो जंगली हाथियों में करीब एक घंटे तक लड़ाई होती रही। इस लड़ाई को देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। हाथियों की इस लड़ाई के दौरान करीब एक एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो गई। मामला शुक्रवार का है। इधर, काफी देर तक हाथियों के बीच लड़ाई जारी रही, तो ग्रामीणों ने शोर मचाना शुरू किया। इसके बाद दोनों हाथी जंगल की ओर भाग गए। नीमडीह प्रखंड में जंगली हाथियों का एक झुड़ विचरण कर रहा है। घरों में रखे अनाज चट कर जा रहे हाथी इधर, कादला गांव में जंगली हाथियों का झुंड चौधरी प्रमाणिक के आलू और बांदु गांव निवासी दीनू महतो का धान खा गए। इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है। हाथी जंगल को छोड़कर गांवों में विचरण कर रहे हैं और फसलों को नुकसान पंहुचा रहे हैं। इस कारण किसानों में दहशत व्याप्त है। खेत से लेकर खलियान में धान नहीं मिलने से अब हाथियों के झुंड घर में रखे अनाज को भी निशाना बना रहे हैं। शाम ढलते ही जंगली हाथियों का झुंड विभिन्न जंगलों से निकलकर गावों में प्रवेश कर जाता है। घरों की चार दीवार को तोड़कर अंदर रखे धान, चावल, आलू आदि खा जा रहे हैं। तीन दिन पहले कदला पहाड़ पर 16 हाथियों का झुंड डेरा डाले हुए था। उसी झुंड से एक हाथी बिछड़ कर जुगीलोंग के मां मनसा महिला समिति राशन दुकान में रखे अनाज को खा गया। वन क्षेत्र के पदाधिकारी क्षतिपूर्ति पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। न ही एलिफेंट ड्राइव की टीम हाथियों को दलमा सेंचुरी की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है। ये भी पढ़िए हाथियों के लिए खेल का मैदान बना धान का खेत:बच्चे के जन्म की वजह से नहीं छोड़ रहे इलाका; लोगों के लिए फसल बचाना चुनौती चांडिल में जंगली हाथियों के उत्पात के कारण किसानों के लिए धान की फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है। खेतों में तैयार धान की फसल को जंगली हाथी खाकर और रौंद कर नष्ट कर रहे हैं। हाथी रोज किसी ना किसी गांव में घुस फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। धान का खेत हाथियों के लिए खेल का मैदान बन गया है। दो दंतेल हाथियों को अक्सर खेतों में आपस में खेलते देखा जा रहा है। यह सिलसिला करीब तीन महीने से चल रहा है। पढ़िए पूरी खबर…


