चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया को राहत नहीं:सांसद तिवारी के सवाल पर केंद्र का जवाब, फैसला प्रशासन के जिम्मे, फ्री होल्ड का प्रस्ताव खारिज

चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर फिलहाल उद्योगपतियों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। लोकसभा में सांसद मनीष तिवारी द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि ज्यादातर मामले चंडीगढ़ प्रशासन और गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में प्रश्न संख्या 2096 के माध्यम से चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि यहां निर्माण अनुपात (एफएआर) केवल 0.75 तक सीमित है, जिससे उद्योगों के विस्तार में दिक्कत आ रही है। साथ ही लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड (पूर्ण स्वामित्व) में बदलने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा भवन उल्लंघन नोटिसों की समस्या और उद्योगों को राहत देने के लिए एकमुश्त राहत योजना लागू करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। 0.5 निर्माण अनुपात की अनुमति केंद्र सरकार ने बताया कि पहले इंडस्ट्रियल एरिया में 0.5 निर्माण अनुपात की अनुमति थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 0.6 और फिर 0.75/1.00 तक किया गया। सरकार ने यह भी माना कि पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में निर्माण अनुपात 2.5 से 3.0 तक है। हालांकि चंडीगढ़ में इसे बढ़ाने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 23 जनवरी 2026 को उपायुक्त-सह-एस्टेट अधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है, जो भवन नियमों की समीक्षा कर रही है। लेकिन अभी कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। फ्री होल्ड का प्रस्ताव खारिज औद्योगिक और व्यावसायिक भूखंडों को लीज से फ्री होल्ड में बदलने के प्रस्ताव को गृह मंत्रालय ने स्वीकार नहीं किया है। सरकार ने कहा कि यह विषय चंडीगढ़ प्रशासन और गृह मंत्रालय के अधीन है। राहत योजना पर भी नहीं मिली मंजूरी भवन उल्लंघनों के लिए फिलहाल कोई एकमुश्त राहत योजना लागू नहीं है। दंड प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव गृह मंत्रालय के पास लंबित है। सरकार का कहना है कि वह एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) के लिए अनुकूल माहौल बनाना चाहती है, लेकिन फैसले स्थानीय कानूनों के तहत ही होंगे। सांसद ने जताई नाराजगी सरकार के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि पिछले 20 महीनों में मिले जवाबों से साफ है कि चंडीगढ़ की समस्याओं को हल करने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से शहर का औद्योगिक विकास रुक सा गया है। निवेश और व्यापार के मामले में चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और न्यू चंडीगढ़ से पीछे होता जा रहा है, जहां ज्यादा लचीली नीतियों के कारण तेजी से विकास हो रहा है। तिवारी ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो चंडीगढ़ निवेश आकर्षित करने की दौड़ में और पीछे चला जाएगा।

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