चंडीगढ़ ई-बीट स्मार्ट पुलिसिंग परियोजना में ₹3.24 करोड़ खर्च:₹1.99 करोड़ मंजूर, एक साल किया अपडेट, गृह मंत्रालय के नियमों का नहीं हुआ पालन

चंडीगढ़ पुलिस की ई-बीट/ ई-बीट बुक परियोजना सिर्फ एक साल के लिए शुरू हुई थी, लेकिन पांच साल तक चली। इससे खर्च बहुत बढ़ गया। परियोजना की निगरानी ठीक से नहीं हुई और AMC (वार्षिक रखरखाव) पर भारी भुगतान हुआ। एप्लिकेशन का इस्तेमाल कम हुआ, कई हिस्सों में डेटा बिल्कुल नहीं था। गृह मंत्रालय की योजना में ₹3.24 करोड़ की राशि भी फंसी रही। जनवरी 2019 में यह परियोजना शुरू की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य हर बीट की पुलिसिंग को डिजिटल बनाना था। इस से फील्ड स्टाफ की जिम्मेदारी बढ़ती है और उनकी कार्यप्रणाली साफ़ रहती है। परियोजना का एक और उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का जल्दी निपटारा करना था। साथ ही, अपराधों पर नजर रखना और पुलिसिंग में पारदर्शिता बढ़ाना भी इसका मकसद था। परियोजना के लिए ₹1.99 करोड़ मंजूर परियोजना के लिए कुल ₹1.99 करोड़ मंजूर किए गए थे। शुरुआत केवल एक साल के लिए हुई थी, लेकिन इसे पांच साल तक चलाया गया। इस दौरान कुल खर्च बढ़कर ₹2.93 करोड़ हो गया। जुलाई 2020 से जून 2024 तक ₹1.91 करोड़ वार्षिक रखरखाव (AMC) पर खर्च हुए। स्वीकृत राशि से ज्यादा खर्च होने के बावजूद प्रशासनिक मंजूरी नहीं ली गई। 2019 में इस एप्लिकेशन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ। लेकिन 2020 के बाद इसका उपयोग तेजी से घट गया। कई मॉड्यूल में डेटा बहुत कम या बिल्कुल नहीं था। अधिकांश डेटा सिर्फ नियमित रिपोर्ट तक ही सीमित रहा। इसलिए यह एप्लिकेशन मैनुअल बीट बुक का अच्छा विकल्प नहीं बन पाया। पैसे खर्च करने में नियमों का पालन नहीं हुआ सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन के प्रधान रामकुमार गर्ग ने कहा कि कम उपयोग और परिणाम न होने के बावजूद भारी साल भर की देखभाल (Annual Maintenance Contract) भुगतान किए गए। इससे सरकारी पैसे पर अनावश्यक बोझ पड़ा। प्रक्रिया में भी गलती हुई।
खर्च ज्यादा होने पर अधिकारी से नई मंजूरी नहीं ली गई। अतिरिक्त जांच में पाया गया कि गृह मंत्रालय की योजना में ₹3.24 करोड़ फंसी हुई है। इसका कारण यह है कि सही मूल्यांकन नहीं किया गया। योजना की स्पष्ट योजना नहीं बनाई गई थी और खर्च का कोई नतीजे से संबंध नहीं था। परियोजना पर ठीक से नजर नहीं रखी गई। प्रशासन में ढीलापन देखा गया। पैसे खर्च करने में नियमों का पालन नहीं हुआ। बिना जांच और परिणाम के सरकारी पैसे खर्च किए गए। जिम्मेदार लोगों को तय करना जरूरी है। खर्च की वसूली या सही होने की जांच करनी चाहिए। आईटी परियोजनाओं पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए। भविष्य में हर काम का परिणाम देखकर मूल्यांकन करना जरूरी है।

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