चंडीगढ़ में बनेगा 50 बेड का ट्रॉमा सेंटर:स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली मंजूरी,23 करोड़ का बजट पास; जमीन न मिलने से अटका था निर्माण

चंडीगढ़ के मनीमाजरा में बनने वाले 50 बेड के ट्रॉमा सेंटर का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय से इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन पर्याप्त जगह तय न होने के कारण निर्माण कार्य में देरी हो रही थी। अब नगर निगम की ओर से मनीमाजरा सिविल अस्पताल के सामने खाली पड़ी 5 एकड़ जमीन स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी गई है, जहां यह ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह के मुताबिक, प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध न होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। अब जो जमीन स्वास्थ्य विभाग को मिली है, वह नगर निगम की है, जिसके बदले प्रशासन विभाग निगम को अन्य स्थान पर जमीन उपलब्ध कराएगा। इस ट्रॉमा सेंटर के लिए पहले ही 23 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया जा चुका है। लेकिन सेंटर अस्पताल के ठीक सामने बन रहा है, इसलिए मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। ट्रॉमा मरीजों को मिलेगी राहत वर्तमान में शहर में ट्रॉमा और इमरजेंसी मामलों के लिए जी.एम.सी.एच.-32, जी.एम.एस.एच.-16 और पी.जी.आई. जैसे बड़े अस्पताल ही उपलब्ध हैं। इनमें पी.जी.आई. और सेक्टर-32 अस्पताल में अत्यधिक भीड़ होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मनीमाजरा और आसपास के लोगों को सेक्टर-16 अस्पताल पहुंचने में काफी समय लगता है, जिससे कई गंभीर मरीजों की जान पर खतरा बन जाता है। इस नए ट्रॉमा सेंटर के बनने से ट्रॉमा मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। यहां 50 बेड की सुविधा होगी और ऑर्थोपेडिक्स तथा इमरजेंसी सर्जरी जैसी सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पिछले साल भेजा प्रस्ताव कोविड महामारी के दौरान पीएम-आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-अभिम) के तहत शहर में 32 नए स्वास्थ्य केंद्र खोलने की योजना थी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर इनमें से एक ट्रॉमा सेंटर बनाने की मांग की थी, क्योंकि चंडीगढ़ में नए हेल्थ सेंटर के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मनीमाजरा में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का फैसला लिया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की होगी भर्ती स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर का सेटअप तैयार होने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल मनीमाजरा सिविल अस्पताल में 100 बेड की सुविधा है, जिसमें गायनी, मेडिसिन और जनरल वार्ड्स के अलावा इमरजेंसी के लिए 13 बेड रिजर्व हैं। लेकिन, गंभीर ट्रॉमा मामलों में मरीजों को रेफर करने की जरूरत पड़ती है। नए ट्रॉमा सेंटर के बनने से यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। ओपीडी में रोजाना 2000 से ज्यादा आते हैं मरीज मनीमाजरा अस्पताल में न सिर्फ स्थानीय बल्कि पंचकूला, किशनगढ़ और अन्य आसपास के क्षेत्रों से भी मरीज आते हैं। यहां रोजाना करीब 2500 से 3000 मरीज ओपीडी में इलाज करवाते हैं, जबकि इमरजेंसी में हर दिन 200 से 300 मरीज आते हैं। फिलहाल रेफरल मामलों में दो से तीन में से एक मरीज को अन्य अस्पताल भेजा जाता है, लेकिन ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद स्थानीय स्तर पर ही गंभीर मरीजों का इलाज संभव होगा।

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