चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव में सियासी तस्वीर साफ हो गई है। BJP, AAP और कांग्रेस ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। गुरुवार को सभी ने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए। इसी बीच आम आदमी पार्टी में बगावत भी सामने आई है, जहां पार्षद रामचंद्र यादव ने डिप्टी मेयर पद के लिए आजाद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरा है। उन्होंने कहा कि पिछली बार तीन पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की थी। पार्टी को उनके खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए थी। अब हर पार्षद को चोर नजर से पार्टी के भीतर देखा जा रहा है। रामचंद्र यादव के नामांकन पत्र पर कवरिंग पार्षद के तौर पर कांग्रेस के सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर बंटी और पार्षद दर्शन ने साइन किए हैं। आम आदमी पार्टी इस बार अकेले चुनाव लड़ रही है। पार्टी के पंजाब प्रभारी जरनैल सिंह ने इसका ऐलान करते हुए कहा कि वो कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं करेगी। पहली बार मेयर का चुनाव हाथ खड़े कर होगा। अब तक सीक्रेट बैलेट से वोटिंग होती थी। हालांकि हाथ हाउस में खड़े कराए जाएंगे या बंद कमरे में, इसको लेकर अभी स्थिति क्लियर नहीं है। AAP ने पार्षदों को रोपड़ के होटल में रखा
AAP को चुनाव में पार्षदों की दलबदली का शक है। इसी आशंका के चलते पार्टी ने अपने पार्षदों को रोपड़ के एक होटल में ठहराया था। इस दौरान पार्षदों के मोबाइल फोन भी बंद करवा दिए गए थे, ताकि किसी तरह का संपर्क या दबाव न बने। गुरुवार को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्षदों को घर जाने की अनुमति दे दी गई। अब ग्राफिक्स में देखिए तीनों पार्टियों के उम्मीदवार…. भाजपा का कांग्रेस और AAP पर तंज
भाजपा ने सोशल मीडिया पर AAP और कांग्रेस को लेकर एक पोस्टर शेयर की है, जिसमें लिखा- आपके ड्रामे को जनता अब जान चुकी है, अब नाटक नहीं हिसाब होगा। इसके बाद भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजीव राणा ने कहा कि जनता अब किसी भ्रम में नहीं है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी भले ही अलग-अलग नॉमिनेशन फाइल कर रहे हों और कागजों में अलग दिखने की कोशिश कर रहे हों। लेकिन जनता सब जानती है। दोनों दलों की भाषा, बयान और राजनीतिक दिशा एक जैसी नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि नॉमिनेशन अलग-अलग भरने से सच्चाई नहीं बदल जाती। जनता देख रही है कि सवालों से बचने के लिए नया ड्रामा रचा जा रहा है। लेकिन अब यह नाटक और ज्यादा नहीं चलेगा। लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी निर्णायक होती है। दिखावटी राजनीति, बयानबाजी और भ्रम फैलाने की कोशिशों का जवाब जनता समय आने पर अपने मत से देगी। भाजपा ने शेयर किया पोस्टर…. कांग्रेस बोली- उम्मीदवार घोषित किए, हम भी गठजोड़ नहीं चाहते
चंडीगढ़ कांग्रेस प्रधान एचएस लक्की ने कहा हमने सबसे पहले उम्मीदवार घोषित किए हैं। हमने ऐलान किया है कि हम गठजोड़ नहीं करेंगे, क्योंकि आम आदमी पार्टी के पास नंबर पूरे नहीं हो रहे थे। पहले इनके दो पार्षद चले गए थे। जबकि 11 में से नौ ही पार्षद किसी रिजॉर्ट में गए हैं। जबकि दो पार्षद इनके साथ नहीं है। ऐसे में साफ है कि हम बीजेपी को नहीं रोक पाएंगे। हमारी सारी वोट साथ है। हमारी पार्टी एकजुट है। वहीं, उन्होंने दावा किया है कि हमारे साथ और लोग जुड़ेंगे। हालांकि, लक्की ने कहा कि हमने बीजेपी को रोकने के लिए प्रयास किया। दोनों पार्टियों के नेताओं ने कोशिश भी की। हालांकि, हमारे पंजाब कांग्रेस के नेता इसके पक्ष में नहीं थे। निगम में मेयर चुनाव का गणित क्या?
नगर निगम में मेयर चुनाव के लिए कुल 35 पार्षदों और 1 सांसद की वोट मान्य होती है। मेयर बनाने के लिए 19 पार्षदों का समर्थन चाहिए। मौजूदा वक्त में भाजपा के पास 18 पार्षद हैं। वहीं AAP के पास 11 पार्षद हैं। कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं जबकि सांसद भी कांग्रेस का है। ऐसे में अगर AAP और कांग्रेस साथ आए तो दोनों तरफ की वोटें 18-18 यानी बराबर हो जांएगी। इसी वजह से ये चुनाव दिलचस्प बना हुआ है। भाजपा कैसे बना सकती है मेयर, 3 सिनेरियो…
1. भाजपा के पास 18 पार्षद हैं, अभी भी भाजपा विपक्षी दलों के पार्षदों से संपर्क कर रही है। अगर कोई पार्षद उनके साथ आता है तो भाजपा के वोट 19 और विपक्ष के 17 रह जाएंगे, ऐसे में भाजपा मेयर बना सकती है। 2. दूसरा सिनेरियो ये है कि अगर विपक्ष का कोई पार्षद वोटिंग के वक्त गैरहाजिर हो जाता है और भाजपा के सभी पार्षद वोटिंग करते हैं तो फिर इससे भी भाजपा का मेयर बन सकता है। अगर ऐसा हुआ तो मेयर के साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद भी भाजपा कब्जा सकती है। 3. कांग्रेस में खींचतान चल रही है। कांग्रेस के पास अभी 6 पार्षद बचे हैं। जिनमें सभी सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर दावेदारी ठोक रहे हैं। अगर उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया जाता तो वह बगावत कर सकते हैं। वह भाजपा के हक में वोटिंग कर सकते हैं या वोटिंग से गैरहाजिर भी रह सकते हैं। निगम में अब तक 4 मेयर कैसे बने?
चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद चुनाव की टर्म 5 साल की होती है। हालांकि मेयर का चुनाव हर साल होता है। इस लिहाज से 5 साल में 5 मेयर बनते हैं। लेकिन पार्षद वही रहते हैं। निगम में कुल 35 पार्षद हैं। चंडीगढ़ के सांसद को एक्स ऑफिशियो मेंबर माना जाता है। उन्हें मेयर चुनाव में वोटिंग का भी अधिकार होता है। पहले चुनाव गुप्त मतदान यानी सीक्रेट बैलेट से होता था। जिसमें अक्सर क्रॉस-वोटिंग या विवाद होते हैं। इसलिए इस बार वोटिंग हाथ खड़े करवाकर होगी।


