चंडीगढ़ सोनू शाह मर्डर केस, गैंगस्टर लॉरेंस कैसे बरी हुआ:2 गवाहों की मौत, 2 कोर्ट में मुकर गए, होटल रजिस्टर गायब, CCTV फुटेज जब्त नहीं

चंडीगढ़ के प्रॉपर्टी डीलर सोनू शाह का उसी के ऑफिस में कत्ल के केस की 7 साल चली सुनवाई में गैंगस्टर लॉरेंस को कोर्ट ने बरी कर दिया। कोर्ट में पुलिस के सबूत और दलीलें कमजोर साबित हुईं। पुलिस वॉयस मैसेज की फोरेंसिक जांच कराना भूल गई। 2 गवाहों की मौत हो गई जबकि 2 कोर्ट में मुकर गए। संदिग्ध जिस होटल में ठहरे, वह रजिस्टर क्राइम ब्रांच के कब्जे में था, लेकिन क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में कहा कि रजिस्टर गायब हो गया है। यह रजिस्टर केस का अहम सबूत था। क्राइम ब्रांच में जिन पुलिसवालों की जिम्मेदारी में यह रजिस्टर था, उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय मामले में लीपापोती की जा रही है। यही नहीं, इस हत्याकांड को लेकर गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस से पूछताछ और जांच को लेकर सवालों के ठोस जवाब भी चंडीगढ़ पुलिस नहीं दे पाई। इस मामले में लॉरेंस और उसके 4 साथियों को कोर्ट ने बरी कर दिया। 3 आरोपियों को दोषी करार दिया गया, जिन्हें आज सजा सुनाई जाएगी। चंडीगढ़ के इस हाईप्रोफाइल मर्डर केस को लेकर दैनिक भास्कर ने पुलिस, सोनू शाह और लॉरेंस के वकील से बात की। लॉरेंस कैसे बुरी हुआ, पुलिस ने कहां-कहां चूक की, जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले 4 पॉइंट में जानिए, मामला क्या है? गैंगस्टर लॉरेंस ने सुनवाई में कहा- मैं सोनू शाह को जानता तक नहीं, न ही मेरा शूटरों या सह-आरोपियों से कोई संबंध है। मैंने किसी को हत्या करने के लिए नहीं कहा, सारे आरोप झूठे हैं अब जानिए, लॉरेंस बरी कैसे हुआ लॉरेंस के एडवोकेट ने कहा- ठोस सबूत नहीं थे
लॉरेंस और राजू बसोदी की ओर से सीनियर एडवोकेट तरमिंदर सिंह ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ ठोस और प्रत्यक्ष सबूत पेश करने में पुलिस असफल रही। जिसके बाद कोर्ट ने दलीलों और रिकॉर्ड के आधार पर लॉरेंस और राजू बसोदी को बरी कर दिया। मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। अब दोषी करार दिए गए तीन आरोपियों की सजा पर 20 फरवरी को निर्णय होगा।

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