चंडीगढ़ CHB नहीं बेच पाएगा बिल्डर को जमीन:सेक्टर-53 हाउसिंग प्रोजेक्ट में अड़चन,शर्त हटवाने के लिए एस्टेट ऑफिस को पत्र लिखा

चंडीगढ़ सेक्टर-53 में प्रस्तावित हाउसिंग प्रोजेक्ट एक बार फिर अटक गया है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) को प्रोजेक्ट के लिए तय 9 एकड़ जमीन निजी बिल्डर को बेचने में दिक्कत आ रही है। वजह यह है कि जब यह जमीन एस्टेट ऑफिस ने CHB को अलॉट की थी, तब शर्त लगाई गई थी कि हाउसिंग बोर्ड खुद ही इस जमीन पर निर्माण करेगा। इसी शर्त के कारण अब जमीन की नीलामी संभव नहीं हो पा रही है।
CHB ने अब इस शर्त को हटवाने के लिए एस्टेट ऑफिस को पत्र लिखा है। बोर्ड का कहना है कि वह अब खुद फ्लैट नहीं बनाएगा और जमीन को नीलाम कर निजी डेवलपर से हाउसिंग प्रोजेक्ट तैयार करवाना चाहता है। लेकिन अलॉटमेंट की शर्त आड़े आने से नीलामी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। पहली बार निजी डेवलपर को देने की तैयारी
अब तक CHB को जितनी भी जमीन मिली, उन सभी पर बोर्ड ने खुद निर्माण कर लोगों को मकान अलॉट किए। यह पहली बार है जब CHB ने जमीन निजी बिल्डर को नीलाम करने का फैसला लिया है। इस जमीन की नीलामी अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन शर्त के चलते पूरा मामला अटक गया। 2003 में सस्ती जमीन, अब कीमत करोड़ों में
CHB ने वर्ष 2003 में सेक्टर-53 की करीब 21 एकड़ जमीन मात्र 5 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से अधिग्रहित की थी। अब उसी जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में पहुंच चुकी है। इसमें से 9 एकड़ जमीन को नीलाम करने की योजना है, जबकि बाकी जमीन हाउसिंग इम्प्लॉइज स्कीम के लिए रखी गई है।
CHB पिछले 12 वर्षों से शहर में एक भी अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम लॉन्च नहीं कर पाया है। वर्ष 2008 की हाउसिंग इम्प्लॉइज स्कीम के लिए प्रशासन सस्ती दरों पर जमीन देने को तैयार नहीं है। कर्मचारियों के पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला आने के बावजूद प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां मामला अभी विचाराधीन है। 3930 कर्मचारी 16 साल से इंतजार में
करीब 3930 सरकारी कर्मचारी पिछले 16 साल से अपने फ्लैट के इंतजार में हैं। प्रशासन का कहना है कि वह बाजार मूल्य से कम दर पर जमीन नहीं दे सकता। केंद्र सरकार ने 5 अक्तूबर 2012 को साफ निर्देश दिए थे कि किसी भी योजना के लिए जमीन बाजार दर से कम पर न दी जाए।
प्रशासन ने मल्टी स्टोरी इमारतों और फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR) बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा है। प्रशासन का कहना है कि अगर मंजूरी मिल जाती है तो निजी डेवलपर बहुमंजिला इस प्रोजेक्ट के बनने से फ्लैट कम कीमत में मिल सकेंगे। यह काम प्रशासक के आदेश पर किया जा रहा है। महंगे फ्लैटों के कारण CHB ने कदम पीछे खींचे
पहले CHB ने खुद हाउसिंग स्कीम लॉन्च करने का फैसला लिया था, लेकिन प्रस्तावित कीमतें बहुत ज्यादा आ रही थीं। अनुमान के मुताबिक तीन बेडरूम फ्लैट की कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपये, दो बेडरूम फ्लैट की करीब 1.97 करोड़ रुपये और ईडब्ल्यूएस फ्लैट की कीमत लगभग 74 लाख रुपये थी। अप्रैल से कलेक्टर रेट में 35 से 40 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद कीमतें और बढ़ गईं। इसी वजह से योजना की किफायत पर सवाल खड़े हुए और CHB ने खुद प्रोजेक्ट विकसित करने से हाथ खींच लिया।

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