चंडीगढ़ PGI आज से बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू:10 मिनट से ज्यादा तो आधे दिन की छुट्टी,आदतन लेट आने वालों पर होगी प्रशासनिक कार्रवाई

चंडीगढ़ के प्रमुख चिकित्सा संस्थान पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) में स्टाफ की देरी से आने की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए आज से बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू कर दी गई है। 2 मार्च, सोमवार से इस नई व्यवस्था की शुरुआत एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर (ए.पी.सी.) से की गई है। पीजीआई प्रशासन के अनुसार यह फैसला मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए लिया गया है। कई बार ओपीडी और वार्डों में मरीजों को समय पर टेस्ट और प्रशासनिक औपचारिकताओं के लिए संबंधित कर्मचारी अपनी सीट पर नहीं मिलते थे, जिससे इलाज में देरी हो रही थी। ड्यूटी रोस्टर के अनुसार 9:30 बजे हाजिरी अनिवार्य पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल द्वारा जारी कार्यालय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एपीसी के सभी प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारियों को ड्यूटी रोस्टर के अनुसार सुबह 9:30 बजे तक बायोमैट्रिक सिस्टम पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। आकस्मिक कारणों से अधिकतम 10 मिनट की छूट दी गई है, लेकिन 10 मिनट से अधिक देरी होने पर संबंधित कर्मचारी की कैजुअल लीव में से आधे दिन की छुट्टी काटी जाएगी। लगातार देरी करने वालों को यह छूट भी नहीं मिलेगी। महीने में दो बार एक घंटे तक की देरी, यदि अपरिहार्य कारणों के साथ हो, तो ए.पी.सी. के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक उसे माफ कर सकते हैं। आदतन लेट वालों की सूची जाएगी एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, दोपहर बाद कई बार डॉक्टरों द्वारा लिखे गए टेस्ट नहीं हो पाते थे क्योंकि संबंधित स्टाफ उपलब्ध नहीं होता था। इसका खामियाजा खासकर बच्चों के मरीजों को भुगतना पड़ रहा था, जिन्हें अगले दिन दोबारा ओपीडी में आना पड़ता था। इससे ओपीडी में मरीजों का दबाव भी बढ़ रहा था। अब स्टाफ को निर्धारित अवधि तक ड्यूटी देना अनिवार्य होगा और बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराए बिना ए.पी.सी. नहीं छोड़ा जा सकेगा। कार्यालय आदेश के अनुसार हर महीने के अंत में बायोमैट्रिक रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। आदतन देरी से आने वाले कर्मचारियों की सूची एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच को भेजी जाएगी ताकि आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जा सके। अचानक अवकाश लेने की स्थिति में उसी दिन कंट्रोलिंग ऑफिसर और प्रशासनिक ई-मेल पर सूचना देना अनिवार्य होगा और अगले दिन आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इस नई व्यवस्था के तहत ए.पी.सी. स्टाफ को 28 फरवरी तक अपने फिंगर इम्प्रेशन दर्ज कराने का समय दिया गया था। दो और विभागों में रोबोटिक सर्जरी पीजीआई में रोबोट से होने वाली सर्जरी का काम अब और बढ़ सकता है। संस्थान में सबसे पहले साल 2016 में यूरोलॉजी विभाग में रोबोटिक सर्जरी शुरू की गई थी। अब 2022 में पूर्व विभागाध्यक्ष द्वारा दी गई दान राशि से एक नया रोबोट खरीदा गया है। यह रोबोट नेफ्रोलॉजी विभाग में किडनी के मरीजों की सर्जरी में मदद करेगा, जिससे ऑपरेशन ज्यादा सटीक और सुरक्षित तरीके से किए जा सकेंगे। इस समय आर्थोपेडिक्स विभाग रोबोट की मदद से घुटनों का ऑपरेशन कर रहा है। फिलहाल यह रोबोट एक निजी कंपनी ने उपलब्ध कराया है। अब विभाग ने अपना खुद का रोबोट खरीदने के लिए पी.जी.आई. प्रशासन को प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा जनरल सर्जरी विभाग ने भी रोबोट खरीदने की मांग की है। अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है, तो आने वाले समय में पी.जी.आई. में रोबोट से ऑपरेशन की सुविधा और बेहतर हो जाएगी। इससे मरीजों को आधुनिक इलाज का फायदा मिलेगा।

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