चंपाई नाराज; बोले-रायशुमारी से रखा दूर, इसके पीछे प्रभावशाली व्यक्ति

नगर निकाय चुनाव निर्णायक चरण में हैं, इसी बीच पूर्व सीएम और कोल्हान क्षेत्र के एकमात्र भाजपा विधायक चंपाई सोरेन पार्टी से नाराज हैं। वे बैठकों-संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। इस संबंध में चंपाई सोरेन का कहना है कि पार्टी की ओर से उन्हें बैठकों और रायशुमारी की सूचना ही नहीं दी जाती है। जब बुनियादी जानकारी तक साझा नहीं की जाती, तो फिर सक्रिय भूमिका निभाने का सवाल कहां उठता है। चंपाई ने यह भी संकेत दिया कि इस घटनाक्रम के पीछे कोई प्रभावशाली व्यक्ति हो सकता है, जो नहीं चाहता कि वे पार्टी के भीतर ज्यादा सक्रिय रहें। चंपाई के आरोपों पर आदित्यपुर नगर निगम चुनाव के प्रभारी शैलेंद्र सिंह ने कहा-चंपाई प्रायः मोबाइल पास नहीं रखते या बंद रहता है। उनके पीए चंचल गोस्वामी को कार्यक्रमों-बैठकों की सूचना दी जाती है, पर वे शामिल नहीं होते हैं। प्रत्याशी चयन में विधायक से नहीं हुई रायशुमारी: समर्थक चंपाई सोरेन के कुछ सहयोगियों ने सवाल उठाया है कि क्या किसी विधायक के क्षेत्र में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया उनकी अनुपस्थिति में पूरी करना उचित है। उनका कहना है कि कोल्हान से भाजपा का सिर्फ एक ही विधायक है और ऐसे में रायशुमारी में उन्हें शामिल न करना संगठनात्मक संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। जब पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार न करने को लेकर चंपाई सोरेन से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि जब रायशुमारी में विधायक को शामिल ही नहीं किया गया, तो बाद में प्रचार करने का कोई औचित्य नहीं बनता। चंपाई चाहते थे किसी एक को समर्थन नहीं दे दल: शैलेंद्र आदित्यपुर निकाय प्रभारी शैलेंद्र सिंह के अनुसार चंपाई सोरेन चाहते थे कि किसी एक प्रत्याशी को पार्टी का समर्थन न दिया जाए। उनका मानना था कि जो भी जीतकर आएगा, वह भाजपा का ही होगा। हालांकि, पार्टी ने रायशुमारी के बाद सभी नगर निगम क्षेत्रों में एक-एक प्रत्याशी को आधिकारिक समर्थन देने का फैसला किया। शैलेंद्र सिंह का कहना है कि चंपाई सोरेन ने इस निर्णय को नहीं माना। उनका यह भी दावा है कि पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह की बैठक समेत सभी बैठकों की सूचना चंपाई सोरेन को दी गई थी। आदित्यपुर-सरायकेला में समर्थकों के चुनाव में उतारने से बढ़ा टकराव राजनीतिक विवाद तब और गहरा गया जब यह सामने आया कि आदित्यपुर नगर निगम और सरायकेला नगर पंचायत चुनाव में चंपाई सोरेन ने अपने समर्थकों को खड़ा कर दिया। पार्टी द्वारा आधिकारिक समर्थन घोषित किए जाने के बावजूद उनके समर्थक उम्मीदवारों ने नामांकन वापस नहीं लिया। आदित्यपुर नगर निगम में चंपाई समर्थक सुनीता लियांगी चुनाव मैदान में बनी हुई हैं, जबकि सरायकेला नगर पंचायत में पार्टी समर्थित प्रत्याशी सुमित चौधरी के खिलाफ उनके पूर्व विधायक प्रतिनिधि सानंद आचार्या चुनाव लड़ रहे हैं। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या चंपाई अलग राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र तैयार कर रहे हैं। ‘कोल्हान टाइगर’ की चुप्पी के सियासी मायने… चंपाई सोरेन और शैलेंद्र सिंह के परस्पर विरोधी बयानों के बाद यह सवाल प्रासंगिक हो गया है कि क्या भाजपा के भीतर कोई ऐसी अंदरूनी राजनीति चल रही है, जिससे ‘कोल्हान टाइगर’ कहे जाने वाले चंपाई सोरेन खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं। या फिर यह रणनीतिक दबाव है, जिसके जरिए वे पार्टी नेतृत्व से अधिक राजनीतिक स्पेस हासिल करना चाहते हैं। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि चंपाई सोरेन को भाजपा ने बड़े राजनीतिक संदेश के साथ पार्टी में शामिल कराया था। उनके कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बारिश के बावजूद रांची से जमशेदपुर सड़क मार्ग से पहुंचना इसी रणनीति का हिस्सा माना गया था। उस समय चंपाई सोरेन को कोल्हान में भाजपा का बड़ा आदिवासी चेहरा बताया गया था।

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