गुमला|चांद के दीदार के साथ अल्लाह की इबादत का मुकद्दस महीना रमजान शुरू हो गया। बुधवार की शाम चांद नजर आते ही मुस्लिम समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। ईशा की नमाज के बाद मस्जिदों में विशेष नमाज तारावीह का सिलसिला शुरू हुआ और गुरुवार से पवित्र माह रोजे का विधिवत आगाज हो गया। पहले रोजे के साथ ही रोजेदारों ने खुदा की इबादत में खुद को मशगूल कर लिया। यह सिलसिला पूरे तीस दिनों तक अनवरत जारी रहेगा। बताया जा रहा है कि इस बार रोजे की अवधि अपेक्षाकृत कम है। अनुमान के अनुसार सबसे लंबा रोजा 13 घंटे 34 मिनट का और सबसे छोटा रोजा करीब 12 घंटे 46 मिनट का रहेगा। पिछले दस वर्षों की तुलना में इस बार रोजे की अवधि में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। रोजे की समयावधि मौसम और दिन की लंबाई पर निर्भर करती है। गर्मियों में दिन लंबे होने से रोजा अधिक समय का होता है। जबकि सर्दियों में अवधि कम हो जाती है। चांद के दीदार के बाद 19 फरवरी से रमजान की शुरुआत हो गई है। इस हिसाब से आखिरी रोजा 20 मार्च को होने की संभावना है। खास बात यह है कि इस बार रमजान में पांच जुमे पड़ सकते हैं। संभावित तिथियों के अनुसार 20 फरवरी, 27 फरवरी, 6 मार्च, 13 मार्च और 20 मार्च को जुमे की नमाज अदा की जाएगी। ऐसे में अंतिम रोजा अलविदा जुमा के दिन पड़ने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जो इस रमजान को और भी खास बना देता है। कारी आफताब ने कहा कि रमजान सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह महीना सब्र, तकवा और इबादत का पैगाम देता है।


