भास्कर न्यूज | गिरिडीह शादी के नाम पर गरीब बच्चियों की तस्करी का मामला सामने आया है। गिरिडीह जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में एक नाबालिग को पश्चिम बंगाल ले जाने की तैयारी थी। चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना मिली कि 24 साउथ परगना से कुछ लोग बिरनी प्रखंड के एक दलित परिवार की नाबालिग से शादी कर उसे बंगाल ले जाने वाले हैं। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन ने मुफ्फसिल थाना को जानकारी दी। थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो के निर्देश पर टीम गठित कर गिरिडीह बस स्टैंड में छापा मारा गया। नाबालिग को बस से ले जाया जा रहा था। पुलिस ने समय रहते बच्ची को दलालों के चंगुल से छुड़ा िलया। उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए बनवासी विकास आश्रम और चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट रूपा कुमारी के साथ भेजा गया। वहां बच्ची की काउंसलिंग, मेडिकल जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। छापेमारी में समीर नस्कर (25) और उसके पिता कालिंद्र नस्कर को हिरासत में लिया गया। दोनों पश्चिम बंगाल के 24 साउथ परगना जिले के अमझा राहत गांव के रहने वाले हैं। इनके साथ एक महिला नीतू कुमारी भी पकड़ी गई। वह बिरनी प्रखंड की रहने वाली है और खुद भी फर्जी शादी की शिकार रह चुकी है। वह खुद को नाबालिग की मौसी बताती है और इस मामले में बिचौलिए की भूमिका निभा रही थी। बनवासी विकास आश्रम के सचिव और बाल अधिकार कार्यकर्ता सुरेश कुमार शक्ति ने कहा कि गिरिडीह में जब भी फर्जी शादी और तस्करी का मामला आता है, उसमें कोई न कोई स्थानीय बिचौलिया शामिल होता है। बच्चियों की खरीद-फरोख्त में पैसे का लेन-देन होता है। इस मामले को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन ने गंभीरता से लिया है। बंगाल में भी इससे जुड़े संगठनों से तस्करों की जांच करने का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस रैकेट की गहराई से जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। रेस्क्यू अभियान में चाइल्ड हेल्पलाइन की सुनीता कुमारी, नरेश कुमार, प्रभु कुमार और रूपा कुमारी की भूमिका सराहनीय रही।


