नक्सलवाद को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयानों पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष ने कहा कि नक्सलवाद के मुद्दे पर गृहमंत्री राजनीतिक विद्वेष के चलते तथ्यों से अलग बयान दे रहे हैं, जबकि चार साल पहले वे खुद भूपेश सरकार के कामकाज की सराहना कर चुके हैं। कांग्रेस का दावा है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब नक्सली घटनाओं में लगातार कमी दर्ज की गई। पार्टी ने याद दिलाया कि 5 अप्रैल 2021 को छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान अमित शाह ने मीडिया से कहा था कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद को काफी हद तक पीछे धकेला गया है और नक्सली घटनाओं में करीब 80 फीसदी तक गिरावट आई है। उसी दौरान राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी नक्सलवाद के “पैकअप मोड” में होने की बात कही थी। विश्वास-विकास-सुरक्षा मॉडल का दावा
कांग्रेस ने कहा कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में “विश्वास, विकास और सुरक्षा” के मॉडल पर काम हुआ, जिसका असर जमीन पर दिखा। दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, सड़क और पुलों का निर्माण हुआ और अबूझमाड़ जैसे इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर की गई। पार्टी के अनुसार, सैकड़ों स्कूल खोले गए, राशन दुकानों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया और 67 से अधिक वनोपजों की सरकारी खरीदी शुरू हुई। इससे स्थानीय लोगों का भरोसा सरकार और सुरक्षा बलों पर बढ़ा और नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ। सैकड़ों गांव नक्सल मुक्त होने का दावा
कांग्रेस ने दावा किया कि उसके कार्यकाल में 600 से अधिक गांव नक्सल मुक्त घोषित हुए और नक्सली गतिविधियां सीमित इलाकों तक सिमट गई थीं। पार्टी का कहना है कि सड़क निर्माण, रोजगार के साधन और प्रशासन की पहुंच बढ़ने से नक्सलियों की पकड़ कमजोर पड़ी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आज वही प्रयासों को नजरअंदाज कर राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि नक्सलवाद पर नियंत्रण के पीछे पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों की बड़ी भूमिका रही है।


