प्रसिद्ध समकालीन कलाकार चिंतन उपाध्याय का चर्चित आर्टवर्क अब जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में नई और स्थायी जगह पर स्थापित कर दिया गया है। रेस्टोरेशन के बाद इसे प्रशासन के सहयोग से फ्रंट गेट के पास प्रदर्शित किया गया है, जहां यह आने-जाने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। करीब 10 फीट ऊंची बेबी आकृति में बना यह इंस्टॉलेशन अपनी विशिष्ट बनावट, जटिल चित्रकारी और वैचारिक गहराई के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसमें टेक्नोलॉजी, इतिहास और शेखावाटी कला का अनूठा संगम देखने को मिला। टेक्नोलॉजी और मानवता का प्रतीक चिंतन उपाध्याय ने बताया कि इस आइकॉनिक श्राइन के नाम से सबसे पहला आर्टवर्क ताइवान के एक म्यूजियम में स्थापित किया गया था। इसके साथ तीन अन्य स्कल्पचर्स भी बनाए गए थे, जिनमें से एक मुंबई के नरिमन पॉइंट पर लगा हुआ है। उस समय इसे मुंबई के सार्वजनिक स्थल पर स्थापित होने वाला पहले कंटेम्परेरी आर्टिस्ट का स्कल्पचर माना गया था। भगवान का रूप होता है ‘श्राइन’ का अर्थ उन्होंने बताया कि ‘श्राइन’ का अर्थ भगवान का रूप होता है, लेकिन इस बेबी फेस को उन्होंने एक टेक्नोलॉजिकल फेस के रूप में विकसित किया है। यह आकृति पूरी तरह मानव नहीं दिखती, बल्कि मानव और साइबोर्ग के बीच की एक संरचना जैसी प्रतीत होती है। कलाकार के अनुसार, यह रूप इस बात का प्रतीक है कि टेक्नोलॉजी किस तरह मानव जीवन में विकसित हुई और किस प्रकार मानवता के स्वरूप को प्रभावित करती रही है। शेखावाटी शैली से प्रेरित चित्रांकन इस इंस्टॉलेशन पर राजस्थान की पारंपरिक कलाओं, विशेष रूप से शेखावाटी शैली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। चिंतन ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार शेखावाटी की भित्ति चित्रकारी देखी, तो उसी से प्रेरणा लेकर इस पर काम किया। तकनीकी रूप से यह मिनिएचर स्टाइल के करीब है, लेकिन पूरी तरह पारंपरिक मिनिएचर नहीं है। इतिहास के विभिन्न कालखंडों को किया पेंटिंग्स में शामिल बेबी की आकृति पर बनी पेंटिंग्स में इतिहास के विभिन्न कालखंडों के प्रतीकात्मक चित्र शामिल किए गए हैं। इनमें गांधीजी, उनके तीन बंदर, टोपी पहने अंग्रेज अधिकारी कार चलाते हुए जैसे दृश्य दिखाई देते हैं। कलाकार ने ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक समय तक के इतिहास के विभिन्न अंशों को फ्रेगमेंटेड रूप में चित्रित किया है। हालांकि, इसमें कोई एकल कथा या रैखिक कहानी नहीं है, बल्कि यह इतिहास के अलग-अलग पन्नों का संयोजन है। जयपुर में स्थायी स्थापना, कलाकार के लिए खास क्षण चिंतन उपाध्याय ने कहा कि जयपुर में इस कलाकृति का सार्वजनिक स्थल पर स्थापित होना उनके लिए विशेष अनुभव है। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर आमजन के लिए बना एक सांस्कृतिक केंद्र है और यहां स्थायी रूप से इंस्टॉलेशन लगाया जाना कला और समाज के बीच संवाद का प्रतीक है। गांव में ‘गंगाजल’ प्रोजेक्ट पर कार्य चिंतन इन दिनों अपने गांव में भी एक विशेष प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे गांव की महिलाओं और स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर डिजाइन और कला के माध्यम से रोजगार के अवसर विकसित कर रहे हैं। इस पहल के तहत दो संस्थाओं को भी जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि गांव की करीब 12 से 15 महिलाओं के साथ मिलकर एक बड़े इंस्टॉलेशन पर कार्य किया जा रहा है, जिसका नाम ‘गंगाजल’ रखा गया है। यह प्रोजेक्ट कला के माध्यम से सामाजिक सहभागिता और सशक्तिकरण का प्रयास है।


