चिता में दिल धड़कने का वीडियो, दावा-ये सियाराम बाबा का:सेवादार बोले- ये फेक; संत ने 110 वर्ष की आयु में ली थी अंतिम सांस

निमाड़ के प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा (110) को देह त्यागे पांच दिन हो चुके हैं। इन पांच दिनों में सेवादारों और भक्तों के माध्यम से बाबा से जुड़े कई वास्तविक संस्मरण आए हैं, लेकिन ऐसे कई भ्रामक वीडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनका संत सियाराम बाबा से संबंध नहीं है। ऐसा ही एक वीडियो बाबा की चिता में उनका दिल धड़कने का बताकर वायरल किया जा रहा है। चार दिन से अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रहे वीडियो की पड़ताल करने के लिए दैनिक भास्कर ने जब आश्रम में 22 साल से जुड़े भक्त मोतीराम बिरला से बात की तो उन्होंने इसे पूरी तरह फेक बताया। यह दिख रहा वीडियो में
वीडियो में अंगारों के बीच एक जगह पर दिल जैसा कुछ धड़कता नजर आ रहा है। इसे संत सियाराम बाबा की चिता कहकर प्रसारित किया जा रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि अग्नि बाबा के हृदय को नहीं जला पाई। इस वीडियो को चमत्कार के रूप में देखा जा रहा था। 110 वर्ष की आयु में ली थी अंतिम सांस
बता दें कि प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा का 110 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। बाबा ने बुधवार को मोक्षदा एकादशी पर सुबह 6:10 बजे अंतिम सांस ली थी। वे पिछले 10 दिन से निमोनिया से पीड़ित थे। खरगोन के कसरावद के तेली भट्यान गांव में नर्मदा किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया था। साधु-संतों ने उन्हें मुखाग्नि दी थी। इस दौरान लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। सीएम डॉ. मोहन यादव भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। कई भक्त शाम तक अंत्येष्टि स्थल पर ही बैठे थे
मोतीराम के मुताबिक, बाबा के अंतिम संस्कार के बाद उस पूरे स्थल को बैरिकेड्स से सुरक्षित कर दिया गया था। कई भक्त शाम तक अंत्येष्टि स्थल पर ही बैठे थे, लेकिन ऐसा कोई दृश्य देखने में नहीं आया। इस वीडियो का संत सियाराम बाबा से कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरी तरह फर्जी वीडियो है। कसरावद ब्लॉक के तेली भट्टान स्थित उनके आश्रम से जुड़े सेवकों ने ऐसे वीडियो को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए इन्हें प्रसारित नहीं करने की अपील की। चमत्कार नहीं, कर्म करने के लिए प्रेरित करते थे बाबा
मोतीराम ने बताया कि बाबा चमत्कारों के बजाय कर्म को प्रधानता देते थे। भक्त उनसे आशीर्वाद मांगते थे तो वे उन्हें कर्म करने के लिए प्रेरित करते थे। संत सियाराम बाबा की यह सीख ही हमें सभी तक पहुंचाना है, न कि अंधविश्वास या मनगढ़ंत भ्रामक वीडियो को बढ़ावा देना है। हनुमान जी के भक्त थे संत सियाराम
संत सियाराम बाबा हनुमान जी के भक्त थे। वे रामचरित मानस का पाठ करते रहते थे। भीषण गर्मी हो, सर्दी हो या भारी बारिश, बाबा सिर्फ लंगोटी पहनकर रहते थे। अनुयायियों का कहना है कि उन्होंने साधना के माध्यम से अपने शरीर को मौसम के अनुकूल बना लिया था। यह खबर भी पढ़ें निमाड़ के संत सियाराम बाबा पंचतत्व में विलीन
निमाड़ के प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा पंचतत्व में विलीन हो गए। खरगोन के कसरावद के तेली भट्यान गांव में नर्मदा किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया। साधु-संतों ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। सीएम डॉ. मोहन यादव भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। पढ़ें पूरी खबर

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