चित्तौड़गढ़ शहर में शराब की दुकानों पर सरकारी समय के बाद भी खुलेआम शराब बेची जा रही है। नियम के अनुसार रात 8 बजे के बाद दुकानें बंद हो जानी चाहिए, लेकिन शहर के कई इलाकों में यह नियम सिर्फ कागजों में ही दिखाई देता है। स्टेशन रोड, बस स्टैंड, प्रतापनगर और प्रताप सर्किल के आसपास शराब के ठेकों पर रात में भी बिक्री जारी रहती है। बाहर से दुकान का शटर बंद रहता है, जिससे लगता है कि दुकान बंद है, लेकिन अंदर से शराब बेची जाती है। कुछ जगहों पर शटर के नीचे से बोतलें दी जाती हैं तो कहीं दीवार की साइड में बने छोटे रास्तों या खिड़की जैसे हिस्सों से शराब बाहर पहुंचाई जाती है। यह सब काम खुलेआम हो रहा है और लोगों को इसकी पूरी जानकारी है। शटर बंद, अंदर से चलता है लेन-देन रात के समय दुकानों के बाहर दो लोग क्यूआर कोड लेकर बैठे रहते हैं। ग्राहक आते हैं, मोबाइल से भुगतान करते हैं और फिर शटर के नीचे से शराब की बोतल ले जाते हैं। कई बार तो दुकान के सामने ही नशे में धुत लोग खड़े मिलते हैं। कुछ जगहों पर पीछे की तरफ कमरा बना हुआ है, जहां देर रात तक लोग बैठकर शराब पीते नजर आते हैं। प्रतापनगर में ऐसी व्यवस्था साफ दिखाई देती है। दुकान बाहर से बंद दिखती है, लेकिन अंदर पूरी हलचल रहती है। पैसे लेने और शराब देने का यह तरीका रोज रात को अपनाया जाता है। इससे यह साफ है कि यह सब एक तय व्यवस्था के तहत किया जा रहा है। जानकारी मिलने के बाद भी विभाग चुप सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। कई दुकानों के पास आबकारी विभाग का ऑफिस भी है, फिर भी नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा। लोगों का कहना है कि विभाग को इसकी जानकारी है, लेकिन फिर भी रोक नहीं लगाई जा रही। समय-समय पर शिकायतें भी की गई हैं। शहर के लोगों और ग्रामीणों ने मौखिक और गुप्त रूप से सूचना दी है। मीडिया ने भी कई बार अधिकारियों को इस बारे में बताया है, लेकिन हालात नहीं बदले। कभी-कभी छोटी कार्रवाई कर मामला शांत कर दिया जाता है। तय कीमत से ज्यादा रुपए में बेची जा रही शराब रात आठ बजे के बाद शराब की बिक्री से ठेकेदारों को ज्यादा मुनाफा होता है। कई बार बोतलें तय कीमत से ज्यादा दाम पर बेची जाती हैं। इसी लालच में नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। दुकानों के बाहर नशे में लोग शोर-शराबा करते हैं, जिससे आसपास के लोग परेशान होते हैं। हाईवे पर होटलों में भी देर रात तक शराब की बिक्री हो रही हैं।शहर में शटर डालकर बिक्री की जाती है। पुलिस की गाड़ियां भी रात में गश्त करती हैं, लेकिन कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है। कई बार पुलिस के सामने से भी यह सब होता रहता है। लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।


