चित्तौड़गढ़ की अदालत ने लगभग ढाई साल पुराने एक मामले में फैसला सुनाया है। चित्तौड़गढ़ अपर सेशन न्यायालय संख्या-2 के पीठासीन अधिकारी विनोद कुमार बैरवा ने युवक को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 60 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला साल 2023 का है। सिर पर लोहे के हथियार से हमला किया था मामले में अपर लोक अभियोजक ममता जीनगर ने बताया कि 17 जून 2023 को पीड़ित ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी ने उसकी मां को चार-पांच महीने तक अपने पास रखा था, लेकिन वह बाद में वह लौटकर घर आ गई। 16 जून 2023 की रात को उसके पिता, मां और छोटे भाई सो रहे थे। रात करीब 10 से 11 बजे के बीच आरोपी ने पिता पर लोहे के हथियार से हमला कर दिया। पीड़ित की मां को भी साथ ले गया पीड़ित मौके पर पहुंचा तो उसके पिता गंभीर हालत में पड़े थे और उनके सिर से खून बह रहा था। उनका शरीर हिल नहीं रहा था और तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मौके पर मौजूद भाई ने बताया कि आरोपी ने लोहे के हथियार से मारपीट की थी, जिससे उनके पिता की जान चली गई। इतना ही नहीं, आरोपी उसकी मां पत्नी को भी अपने साथ ले गया। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया। उम्रकैद और 60 हजार जुर्माना सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से बहस हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 10 गवाह और 38 दस्तावेज पेश किए। जांच और गवाहों के आधार पर अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं। यह भी साबित हुआ कि हत्या के बाद आरोपी मृतक की पत्नी को जबरन अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश विनोद कुमार बैरवा ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 60 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।


