चित्तौड़गढ़ जिले में खनिज विभाग द्वारा खनन के लिए चिन्हित किए गए नए डेलिनिएशन (सीमांकन) प्लॉटों की नीलामी अगले महीने 4 मार्च से 13 मार्च के बीच अलग-अलग तारीखों पर की जाएगी। इस नीलामी से राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद है। विभाग ने जिले में मेजर और माइनर मिनरल्स के लिए नए प्लॉट तय किए हैं, जिन्हें अब औपचारिक रूप से नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। नीलामी के माध्यम से सरकार को प्रीमियम राशि और अपफ्रंट पेमेंट के रूप में सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से की जाएगी, ताकि खनन काम निर्धारित सीमा में रहकर संचालित हो सके और अवैध खनन पर रोक लगे। माइनर मिनरल्स के 34 नए प्लॉट चिन्हित, कई गांवों में होगा खनन जिले में माइनर मिनरल्स के लिए कुल 34 नए डेलिनिएशन प्लॉट चिन्हित किए गए हैं। इन प्लॉटों में क्वार्टजाइट, मैसेनरी स्टोन और चाइना क्ले जैसे खनिज शामिल हैं। खनिज विभाग ने अलग-अलग तहसीलों और गांवों में सर्वे के बाद इन प्लॉटों को तय किया है। खनिज विभाग के एमई एहतेशाम सिद्दीकी ने बताया कि खनि अभियंता चित्तौड़गढ़ कार्यालय के क्षेत्राधिकार में कई गांवों में अप्रधान खनिजों के प्लॉट चिन्हित किए गए हैं। ग्राम कोजुंदा (तहसील गंगरार) में 4 प्लॉट राजकीय बिलानाम पहाड़ और बंजर जमीन से चाइना क्ले और मैसेनरी स्टोन के लिए तय किए गए हैं। वहीं, ग्राम कटुंडा (तहसील बेगूं) में 17 प्लॉट बंजर बिलानाम जमीन से मैसेनरी स्टोन के लिए चिन्हित किए गए हैं। ग्राम जवालियों का खेड़ा (गंगरार) में 3 प्लॉट राजकीय बंजर बिलानाम जमीन से मैसेनरी स्टोन के लिए निर्धारित किए गए हैं। निंबाहेड़ा क्षेत्र में भी प्लॉट तय, तय तारीखों पर होगी नीलामी कार्यालय सहायक खनि अभियंता निंबाहेड़ा के क्षेत्राधिकार में भी कई प्लॉटों को नीलामी में शामिल किया गया है। ग्राम गढ़वाड़ा (तहसील निंबाहेड़ा) में 5 प्लॉट राजकीय बिलानाम जमीन से मैसेनरी स्टोन के लिए चिन्हित किए गए हैं, जबकि ग्राम निकुम्भ (तहसील बड़ीसादड़ी) में 5 प्लॉट राजकीय बिलानाम जमीन से क्वार्टजाइट के लिए तय किए गए हैं। विभाग ने सभी चिन्हित प्लॉटों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने की कार्रवाई पूरी कर ली है। यह नीलामी 4 मार्च, 5 मार्च, 6 मार्च, 10 मार्च, 11 मार्च, 12 मार्च और 13 मार्च को आयोजित की जाएगी। विभाग का कहना है कि नीलामी के बाद संबंधित खनन पट्टेधारकों को तय नियमों और शर्तों के तहत काम करने की अनुमति दी जाएगी। इससे जिले में खनन गतिविधियां व्यवस्थित रूप से संचालित होंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है।


