छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़, चिरमिरी और भरतपुर के जंगलों में तेंदूपत्ता संग्रहण का काम शुरू हो गया है। स्थानीय लोग सुबह से शाम तक जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ने का काम करते हैं। वे डोरा और बरगद जैसे पेड़ों की छाल से विशेष रस्सी बनाते हैं। यह रस्सी दीमक प्रतिरोधी होती है और तेंदूपत्ते को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करती है। 42 डिग्री की तपती गर्मी में भी ग्रामीण तेंदूपत्ता संग्रहण में जुटे हैं। बाजार में तेंदुपत्ता 500 रुपए सैकड़ा हिसाब से बेचते है। एक गड्डी में 50 पत्ते होते है। कई बार जंगल में रात भी रुकना पड़ता है ग्राम गेदलाल के निवासी पूरे दिन जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने का काम करते हैं। कई बार उन्हें जंगल में ही रात बितानी पड़ती है। बता दें यह ग्रामीणों के लिए वार्षिक आय का प्रमुख स्रोत है। राज्य सरकार ने इस साल तेंदूपत्ते की प्रति मानक बोरी 5,500 रुपए की दर तय की है। संग्रहण करने वाली महिलाओं को जंगल में सुरक्षित काम करने के लिए चरण पादुका भी दी जाएंगी। 70 वन आच्छादन और भरपूर वनोपज कोरिया और मनेंद्रगढ़-भरतपुर वन मंडल न सिर्फ वन्य जीवों के लिए बल्कि औषधीय गुणों वाले पेड़-पौधों और वनोपज के लिए भी प्रसिद्ध है। महुआ, चार, चिरौंजी और तेंदूपत्ता जैसी वन उपज यहां के ग्रामीणों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इस तेंदूपत्ता सीजन में कोरिया जिले के वनांचल में हरियाली के साथ उम्मीदों की भी बहार आई है। जंगलों की गोद में बसे ये गांव एक बार फिर ‘हरा सोना’ के भरोसे अपने आर्थिक भविष्य को संवारने में जुट गए हैं। गांवों में रोजगार के अन्य साधन कम होने के कारण यह वन संपदा उनके लिए वरदान साबित हो रही है।


