छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा में सक्रिय नक्सली जोनल कमांडर गिरफ्तार:बलरामपुर पुलिस ने झारखंड से किया गिरफ्तार, दर्जनों नक्सली वारदातों में रहा है शामिल

छत्तीसगढ़ एवं झारखंड सीमाक्षेत्र में सक्रिय नक्सली जोनल कमांडर राजेन्द्र सिंह खैरवार उर्फ दिलीप उर्फ विश्वनाथ को बलरामपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वह छत्तीसगढ़ एवं झारखंड में दर्जनों नक्सली वारदातों में शामिल रहा है। राजेंद्र खैरवार पूर्व में भी गिरफ्तार किया गया था एवं जेल भी गया था। जमानत पर छूटने के बाद वह फिर से नक्सली संगठन में सक्रिय हो गया था। जानकारी के मुताबिक, लगभग 15 वर्ष तक नक्सली संगठन में सक्रिय राजेन्द्र सिंह खैरवार उर्फ दिलीप उर्फ विश्वनाथ को पुलिस ने झारखंड जाकर गिरफ्तार किया है। वह पूर्व में पुलिस के साथ हुए कई मुठभेड़ में भी शामिल रहा है। बलरामपुर जिले में तत्कालीन आइजी स्व. बीएस मरावी पर घात लगाकर हमले की घटना में भी राजेंद्र खैरबार शामिल था। 10 वर्ष पूर्व भी हुआ था गिरफ्तार
राजेन्द्र सिंह खैरवार उर्फ दिलीप वर्ष 2000 में पीपुल्स वार ग्रुप में शामिल हुआ था। उस समय पीडब्ल्यूजी और एमसीसी का विलय नहीं हुआ था। 10 वर्ष पहले बलरामपुर जिले की रघुनाथनगर पुलिस ने उसे बंदूक के साथ गिरफ्तार किया था। इस बार उसकी गिरफ्तारी बलरामपुर जिले के सबाग से चुनचुना पुन्दाग मार्ग पर टिफिन बम लगाने की घटना में की गई है। वह मूलतः गढ़वा जिले के थाना रमकंडा अंतर्गत उदयपुर का निवासी है। उसके घर पहुंचने की सूचना पर बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर के निर्देश पर थाना प्रभारी सामरी की टीम झारखंड पहुंची और उसे गिरफ्तार किया। कई बड़े वारदातों में रहा है शामिल रहा है राजेंद्र
सब जोनल कमांडर राजेंद्र सिंह खैरवार ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2000 से 2002 के मध्य वह नक्सलियों के साथ थाना भंडरिया के ग्राम मरदा बरगड़ व थाना रंका में चिनिया घाट में पुलिस के साथ मुठभेड़ में शामिल रहा। बलरामपुर जिला के चांदो थाना के गाम शाहपुर में पुलिस से भुठभेड़ तथा ग्रामीणों की हत्या, ग्राम चन्दननगर में एहसान मियां एवं उमर फारूख की पिटाई , भँवरमाल के भागीरथी गुप्ता की बंदूक लूट एवं पिटाई, ग्राम महावीरगंज में मुमताज एवं दीक्षित के बंदूक लूट की घटना में शामिल रहा। वर्ष 2006 से अक्टूबर 2008 तक झारखण्ड राज्य के भण्डरिया थाना के बरगड़ के पास कुशमहा टोंगरी में पुलिस पार्टी पर हमला, ग्राम जोनीखाड़ में ग्रामीण की हत्या, ग्राम सरूअत में आगजनी, ग्राम सुतनी महुआ में पुलिस के साथ मुठभेड़, ग्राम मुटकी के महादेव भुईहर की हत्या, ग्राम जोन्हीखाड़ तथा रामरसतबहनी में पुलिस के साथ मुठभेड़ करने में शामिल था। थाना रंका के ग्राम बिलैती में घर जलाने व हत्या की घटना में शामिल रहा। जमुनियाखाड़ जंगल में पुलिस के साथ मुठभेड़, ग्राम नयाडीह जंगल महुवारी ग्राम नेउरा तथा हुझ्दाग एवं बाघमरन में पुलिस के साथ मुठभेड़, ग्राम केरता के विरेन्द्र यादव की हत्या करने में शामिल था। थाना चौनपुर पलामू के ग्राम बान्दूटोला लालमाटी अंधेरीबेड़ा में पुलिस के साथ मुठभेड़ करने में, ग्राम आमडीह खुर्द में ग्रामीण का घर जलाने में तथा ग्राम ढेकली ग्राम खोरका में नक्सली पर्चा बांटने में तथा हथियार इकट्ठा करने में शामिल था। वह छत्तीसगढ़ के रामचन्दरपुर थाना के ग्राम हरिहरपुर में मोबाइल टावर जलाने, हासनदाग घाट में गोलीबारी कर विस्फोट से एसडीओपी की गाड़ी जलाने, उचरवा में तत्कालीन आइजी स्व बीएस मरावी के दल पर हमला तथा कन्हर नदी में पुलिस के उपर गोली चलाने में शामिल रहा है। चांदो थाना के बन्दरचुआं में बम लगाने में तथा आमाझरिया पुंदाग में घात लगाकर तीन जवानों की हत्या व छह को घायल करने में, ग्राम पोखर के महुवर कोरवा की हत्या, चुनचुना सड़क में बम ब्लास्ट, ग्राम जोधपुर चांदो के तेंदूपत्ता फड़ में आग लगाने में शामिल था। राजेंद्र खैरबार ने कई बड़े नक्सली कमांडरों के साथ भी काम किया है। दो बार वह जेल भी भेजा गया था। जेल से छूटकर वह फिर से नक्सली संगठन में सक्रिय हो गया था।

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