छत्तीसगढ़ में राजनीतिक मामलों की वापसी:मुंगेली के 2 प्रकरण समेत अब तक 103 मामले वापस, विजय शर्मा बोले- निर्दोष को नहीं होने देंगे परेशान

छत्तीसगढ़ सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विभिन्न जिलों में दर्ज 103 गैर-गंभीर राजनीतिक मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। गृह विभाग ने जिलों से रिपोर्ट मंगवाई। मंत्रिमंडलीय उपसमिति की अनुशंसा के बाद यह निर्णय लिया गया। न्यायालय की स्वीकृति के बाद 41 मामलों में आरोपियों को राहत मिली है। इन सभी के नाम पुलिस रिकॉर्ड से हटा दिए गए हैं। मुंगेली जिले के दो मामले भी वापस लिए गए हैं। पहला मामला 17 फरवरी 2023 का है। इसमें अवनी कश्यप समेत पांच लोगों पर राष्ट्रीय राजमार्ग 130ए पर विरोध प्रदर्शन कर मार्ग अवरुद्ध करने का आरोप था। दूसरे मामले में मुकेश रोहरा सहित सात लोगों पर यही आरोप था। दोनों मामलों में 9 जनवरी 2025 को न्यायालय ने वापसी की मंजूरी दी। उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार सुशासन की सरकार है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है। पिछली सरकार में कई राजनीतिक मामले दर्ज किए गए थे। सरकार की नीति है कि राजनीतिक कारणों से किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा। राजनीतिक प्रकरणों की वापसी: एक सुव्यवस्थित और कानूनी प्रक्रिया राजनीतिक प्रकरणों की वापसी पूरी तरह से एक विस्तृत, चरणबद्ध और कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत की जाती है, जिसमें कई विभागों और संस्थाओं की सम्मिलित भूमिका होती है। सबसे पहले, राज्य शासन द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में दर्ज राजनीतिक प्रकरणों की समीक्षा करवाई जाती है। इसके लिए गृह विभाग संबंधित जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मंगवाता है, जिनके आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन-से मामले गैर-गंभीर प्रकृति के हैं और जिनमें हिंसा या गंभीर अपराध शामिल नहीं हैं। इसके पश्चात, योग्य मामलों को मंत्रिमंडलीय उपसमिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। उपसमिति द्वारा अनुशंसा मिलने के बाद, प्रकरण को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति हेतु भेजा जाता है। मंत्रिपरिषद से अनुमोदन प्राप्त होने पर, संबंधित प्रकरण को न्यायालय में वापसी के लिए प्रस्तुत किया जाता है। न्यायालय द्वारा गहन समीक्षा के उपरांत यदि अनुमति प्रदान की जाती है, तो अभियुक्तों को विधिवत राहत दी जाती है। इसके बाद उनके नाम पुलिस रिकॉर्ड से हटा दिए जाते हैं और उन्हें मुक्ति प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाता है। राज्य शासन का यह निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, न्याय की भावना और राजनीतिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजनीतिक गतिविधियों के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना न करना पड़े, और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान पूरी तरह बरकरार रहे।

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