महाकुंभ में भगदड़ के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग की है। उनके इस बयान को लेकर लोगों की अगल-अगल प्रतिक्रिया आ रही है। इसी बीच मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर प्रेमासाई महाराज ने छत्तीसगढ़ सरकार से उनके प्रदेश में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। प्रेमा साई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद खुद को सनातन का सेवक बोलते हैं, लेकिन महाकुंभ में जाकर जो व्यवस्था में कमी दिखाई दी उसको सुधारने का प्रयास क्यों नहीं किया। योगी आदित्यनाथ से त्यागपत्र मांगना निंदनीय है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है, अविमुक्तेश्वरानंद राज्य में आने से पहले वो माफी मांगे। साथ ही, लिखित में कहें कि छत्तीसगढ़ आने के बाद वे सनातन धर्म के अनुयायियों के दिल को ठेस नहीं पहुंचाएंगे। अविमुक्तेशवरानंद शंकराचार्य नहीं है प्रेमासाई महाराज ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं है। जब तक कोर्ट में मामला लंबित है, तब तक वे कहां से शंकराचार्य हो गए। कोर्ट का निर्णय आने के बाद हम मानेंगे। उन्होंने खुद को शंकराचार्य घोषित कर रखा है। उंगली उठाने की बजाय व्यवस्थाओं को सुधारने में अपना योगदान देना था प्रेमासाई ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य प्रधान पद होता है। अविमुक्तेश्वरानंद कुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर में पहले प्रशासन और वहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सकते थे। उन्हें कहीं भी जाने की कोई रोक-टोक नहीं है। वह चाहे तो सीधे प्रधानमंत्री से मिल सकते हैं। अगर, अविमुक्तेश्वरानंद व्यवस्थाओं के ऊपर उंगली उठाने की बजाय व्यवस्थाओं को सुधारने में अपना योगदान देते तो आज ऐसी स्थिति नहीं आती। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य का पद छोड़ देना चाहिए प्रेमासाई महाराज ने कहा कि सनातन धर्म के चार स्तंभ और वे चार शंकराचार्य हैं। उसमें से अगर एक स्तंभ डगमगाता हुआ दिख रहा है और जिसके चलते सनातन धर्म का नुकसान हो रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य पद पर अतिक्रमण करके इस पद पर बैठे हुए हैं। मेरा उनसे निवेदन है कि उन्हें शंकराचार्य के पद को छोड़ देना चाहिए। अगर पद छोड़ देंगे तो आपकी जगह दूसरा योद्धा जो धर्म के लिए लड़े वह इस जगह पर विराजमान हो ।


