छत्तीसगढ़ में होली पर देवताओं को मारते हैं लट्ठ:कुंवारी लड़कियां पुरुषों पर बरसाती हैं लाठियां, राहगीर भी रुककर मार खाते हैं,300 साल पुरानी परंपरा

होली का खुमार पूरे देश में अलग-अलग रंगों में नजर आता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है जो वृंदावन के बरसाने की लट्ठमार होली की याद दिलाती है। जिले के पंतोरा गांव में पिछले तीन शताब्दियों से कुंवारी कन्याएं पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं। पुरुषों पर लाठियां बरसाने से पहले गांव के मां भवानी मंदिर में देवताओं पर छड़ी मारकर परंपरा का आगाज किया जाता है। 300 सालों से यह परंपरा चली आ रही है। स्थानीय लोगों की आस्था है कि इस अनोखी होली में लाठियां खाने से साल भर कोई बीमारी पास नहीं भटकती। रंग पंचमी पर सजता है ‘डंगाही’ का दरबार पंतोरा गांव, जो जिला मुख्यालय से करीब 40-45 किलोमीटर दूर स्थित है, वहां यह आयोजन होली के पांचवें दिन यानी रंग पंचमी पर होता है। इसे स्थानीय भाषा में ‘डंगाही होली’ कहा जाता है। इस उत्सव की शुरुआत मां भवानी के मंदिर से होती है। मंदिर में कन्याएं पहले देवाताओं को छड़ी मारकर परंपरा की शुरुआत करती हैं। इसके बाद मंदिर के बाहर खड़ी कन्याओं की टोली वहां से गुजरने वाले हर शख्स पर लाठियां बरसाती हैं। लट्‌ठ बनाने के लिए मड़वारानी जंगल की लकड़ी का इस्तेमाल ग्रामीणों के मुताबिक, इस पर्व के लिए विशेष बांस की छड़ी कोरबा जिले के मड़वारानी जंगल से लाई जाती है। खास बात यह है कि उसी बांस का चयन किया जाता है, जो एक ही कुल्हाड़ी के वार में कट जाए। इसे शुभ माना जाता है। छड़ी को मां भवानी के समक्ष अभिमंत्रित किया जाता है और बैगा (पारंपरिक पुजारी) से सिद्ध कराया जाता है। बीमारियों से मुक्ति की है अटूट आस्था इस लट्ठमार पर्व में केवल स्थानीय रहवासी ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आए उनके रिश्तेदार भी उत्साह से भाग लेते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह आस्था है कि जो भी व्यक्ति इन अभिमंत्रित छड़ियों की मार सहता है, वह साल भर बीमारियों से दूर रहता है। लोग इसे चोट के रूप में नहीं, बल्कि माता के प्रसाद और आशीर्वाद के रूप में स्वीकार करते हैं। राहगीर भी रुककर खाते हैं मार पंतोरा गांव की निवासी मुन्नी बताती है, कि मंदिर के बैगा पूजा के बाद सिद्ध छड़ियां कन्याओं को सौंप देते हैं। इसके बाद लड़कियों की टोली मंदिर के बाहर तैनात हो जाती है और बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको छड़ी मारती है। खास बात यह है कि रास्ते से गुजरने वाले राहगीर भी रुककर इन छड़ियों से मार खाते हैं। इस उत्सव में न तो कोई विरोध करता है और न ही कोई इसका बुरा मानता है। ………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… छत्तीसगढ़ में कब मनाई जाएगी होली?: ज्योतिषाचार्य बोले- 2 से 3 मार्च की रात होलिका दहन के लिए शुभ; जानिए सही मुहूर्त और नियम देशभर में होलिका दहन की तिथि और होली खेलने के दिन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कहीं 2 मार्च तो कहीं 3 मार्च को होलिका दहन की बात कही जा रही है। वहीं रंग खेलने के लिए 4 मार्च का दिन अच्छा माना जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर…

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