छत्तीसगढ़ में खरसिया-नया रायपुर-परमालकसा नई रेलवे लाइन परियोजना की शुरुआत हो गई है। सक्ती के एसडीएम और भू-अर्जन अधिकारी अरुण कुमार सोम ने प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाले 17 गांवों की जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। यह आदेश दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के उप मुख्य अभियंता के पत्र के आधार पर जारी किया गया है। प्रभावित गांवों में डोंगिया, चिखलरौंदा, मलनी, भोथिया, कंकराभाट, भोथीडीह, कलमीडीह, पाड़ाहरदी, गुबकुलिया, सेमरनडीह, करमनडीह, झकहाडीह, नंदेली, आमगांव, कांशीगढ़, बावनबुड़ी और बेलकर्री शामिल हैं। यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रेलवे के टॉप 10 प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसकी कुल लागत 8,741 करोड़ रुपये है। प्रोजेक्ट में 278 किलोमीटर का रूट और 615 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाया जाएगा। इसमें 21 नए रेलवे स्टेशन बनेंगे। साथ ही 48 बड़े और 349 छोटे पुल, 14 रेलवे ओवर ब्रिज, 184 रेलवे अंडर ब्रिज और 5 रेल फ्लाईओवर का निर्माण होगा। इन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ यह रेल लाइन खैरागढ़ से परमालकसा तक जाएगी। यह रायपुर बाईपास से होते हुए छत्तीसगढ़ को सीधे महाराष्ट्र से जोड़ेगी। इससे रायगढ़, जंजगीर-चंपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदाबाजार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जिलों को फायदा होगा। प्रोजेक्ट से हर साल रसद लागत में 2,520 करोड़ रुपये की बचत होगी। साथ ही 22 करोड़ लीटर डीजल की खपत कम होगी। यह प्रोजेक्ट राज्य की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। बलौदाबाजार क्षेत्र में सीमेंट फैक्ट्रियों और अन्य उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।


