हरदीप सिंह सब्जियां और फल गमलों में भी लग सकते हैं। इसको साबित करने वाले लोगों में यहां के एक गुरसिख दंपति भी शामिल हो गए। इस बुजुर्ग जोड़े ने अपनी छत पर गमलों में फूलगोभी, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, पालक, साग, कढ़ी पत्ता, ब्रोकली, चुकंदर, बैंगन, मूली जैसी सब्जियों के साथ-साथ जामुन, किन्नू, अंजीर, बादाम, ड्रैगन फ्रूट और अनार लगा रखे हैं। इन पेड़ांे पर भरपूर फल भी लग रहे हैं। ये पूरी तरह से आर्गेनिक हैं। सतवंत सिंह यहां के डीसी ऑफिस से कानूनगो पद से रिटायर्ड हुए। उनकी जीवनसंगिनी रजवंत कौर सेहत विभाग से रिटायर्ड हैं। उनके बच्चे विदेश चले गए। सेवानिवृत्ति के बाद इस दंपति का समय अच्छी तरह से नहीं बीत रहा था। उन्होंने सोचा कि ऐसा कुछ किया जाए जिससे समय भी कट जाए और कुदरत से भी जुड़े रहें। इसके लिए उन्होंने अपने घर की छत पर ही बागवानी शुरू कर दी और धीरे-धीरे कुछ अलग करते रहे। परिणामस्वरूप, उनकी छत पूरी तरह से एक बगीची का रूप धारण कर चुकी है। इससे प्रतिदिन दो-ढाई किलो सब्जियां मिल जाती हैं। उन्हें सब्जियों के लिए बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। फल भी मिल जाते हैं। इसके लिए कभी-कभार ही बाजार जाना पड़ता है। गुरदासपुर के मोहल्ला संत नगर में घर की छत पर गमलों में लगे पौधे। सतवंत सिंह बताते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद जब कोरोनाकाल आया तो उनका समय मुश्किल से गुजर रहा था। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। उन्होंने पत्नी से सलाह कर छत पर गमले रखकर उनमें पहले फूलों के कुछ पौधे लगाए। इस बीच उन्होंने नर्सरी में जाकर देखा कि वहां पौधों पर सब्जियां लगी हुई थीं। उन्होंने सोचा कि अगर नर्सरी में सब्जियां लग सकती हैं तो गमलों में भी लग सकती हैं। उन्होंने सब्जियों व फलों के पौधों के आकार के बराबर गमले लिए और उनमें पौधे लगाने शुरू कर दिए। उनकी योजना सफल रही। उन्होंने छत पर करीब 100 गमले रखकर उनमें सब्जियां और पेड़-पौधे लगा रखे हैं। वह गमलों में सिर्फ देसी खाद डाल हैं।


