मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शुक्रवार को गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड के ग्राम पंचायत मड़ेली में सुशासन तिहार के तहत आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने शिविर में मौजूद हजारों ग्रामीणों को बड़ी सौगात देते हुए 222 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की घोषणा की। इसमें 75 करोड़ की लागत से मड़ेली में 132 केवी सब स्टेशन और 147 करोड़ की लागत से राजिम-बेलटुकरी-छुरा सड़क चौड़ीकरण की योजना शामिल है। साथ ही पिपरछेड़ी जलाशय के अधूरे निर्माण को पूर्ण करने की घोषणा भी की गई। जिले के सुदूर वनांचल में बसे ग्राम मड़ेली और आसपास के 10 से अधिक गांवों के लोगों का 45 साल का इंतजार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ख़त्म कर दिया। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने मड़ेली के सुशासन समाधान शिविर में इलाक़े की 45 साल से अधूरी पड़ी पीपरछेड़ी सिंचाई परियोजना को पूरा करने की मंज़ूरी दे दी। मीडिया से चर्चा के दौरान जब सीएम साय ने इसकी घोषणा की तो उपस्थित लोगों ने उनका आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री साय ने इस परियोजना को लेकर पर्यावरणीय अनुमति के लिए केंद्रीय स्तर पर सतत प्रयास किए। केंद्र सरकार ने परियोजना की महत्ता को समझते हुए इसे पूरा करने वन एवं पर्यावरणीय मंजूरी दे दी। अब इस परियोजना को पूरा करने का रास्ता साफ हो गया है। वर्तमान में इस परियोजना में नहर प्रणाली का लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। सात माइनर और दो सब माइनर नहरें बनकर तैयार हैं। इसमें आने वाले 114 विभिन्न संरचनाओं का काम भी पूरा हो गया है। इसी तरह घुनघुट्टी नाले पर भी बांध का निर्माण कार्य आधा हो चुका है। इस परियोजना के कैचमेंट एरिया में 175 हेक्टेयर वन भूमि आएगी। पीएम की गारंटी को जमीन पर उतारने में जुटे हैं
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी से काम करने वाली सरकार ही जनता के बीच रिपोर्ट कार्ड लेकर आ सकती है। हम वही कर रहे हैं। उन्होंने भगवान राजीव लोचन के जयकारे से अपना संबोधन शुरू किया और कहा कि हमारी सरकार डेढ़ साल में प्रधानमंत्री की गारंटियों को ज़मीन पर उतारने में जुटी है। परियोजना से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस परियोजना के पूरा होने पर करीब 4000 एकड़ भूमि में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इससे 10 गाँवों के पाँच हज़ार से ज्यादा किसानों की पैदावार बढ़ेगी और आय में सुधार होगा। सरकार ने इसके कामों को पूरा करने के लिए अब तक 85 करोड़ रुपए मंजूर किए है। सीएम ने कहा कि इस योजना को पूरा करने के लिए क्षेत्र के किसानों ने सुशासन तिहार के दौरान आवेदन दिया था।


