राज्य सरकार ने छोटे भू-स्वामियों को बड़ी राहत देते हुए 1 हेक्टेयर से कम की खातेदारी जमीन पर भी क्वारी लाइसेंस आवंटन की अनुमति दे दी है। प्रदेश में अभी करीब 16 हजार क्वेरी लाइसेंस हैं। इस घोषणा से 350 से 450 तक नई लीजें तैयार हो सकती हैं। करीब आठ हजार को रोजगार मिल सकता है। उधर, छोटी खानों की संख्या में दो से तीन प्रतिशत तक वृद्धि तय मानी जा रही है। बजट घोषणा में खान आवंटन में प्रीमियम राशि 10 प्रतिशत घटने, एम-सैंड का उपयोग 50 प्रतिशत तक सरकारी भवनों में उपयोग की घोषणा से निर्माण लागत में कमी का अनुमान है। छोटे ब्लॉक्स के आवंटन की प्रक्रिया आसान होने से अवैध खनन में कमी आएगी। क्यों लेना पड़ा ये फैसला : खनन के लिए एक हैक्टेयर की लीज की अनिवार्यता थी। ऐसे में दो लीजों के बीच जो भूमि बचती थी, उसका नियम अनुसार क्षेत्रफल नहीं होने के कारण विभाग उसमें नीलामी प्रोसेस या खान आवंटन का प्रोसेस नहीं हो सकता था। इन जगहों पर अवैध खनन से लेकर कई तरह के विवाद सामने आते थे। अब एक हेक्टेयर से 0.18 हेक्टेयर का प्रावधान खान विभाग और आमजन के लिए राहत भरा साबित होने की उम्मीद है। डीएलसी दर से प्रीमियम राशि काउंट होती है, अब 10% का फायदा मिलेगा माइनिंग सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने खातेदारी जमीन में खान आवंटन के समय ली जाने वाली प्रीमियम राशि को 40% से घटाकर 30% कर दिया है। इसे ऐसे समझे कि डीएलसी की दर से प्रीमियम राशि तय होती थी । यानी की 100 रूपए डीएलसी है तो 40 रूपए प्रीमियम राशि तय होती थी जो अब घटकर 30 प्रतिशत होगी। इससे खनन के प्रति प्रोत्साहन के रूप में देखा जाएंगा और इसका फायदा खान आवंटन प्राप्त करने वाले व्यक्ति और समूह को होगा। 100 नए खनिज प्लॉट की नीलामी और एमसेंड के उपयोग को बढ़ावा: प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी के लिए सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में मेजर और माइनर मिनरल के 100 नए ब्लॉक्स की नीलामी करने का लक्ष्य रखा है। इसमें चूना पत्थर और लौह धातुओं के ब्लॉक्स प्रमुख होंगे। उधर बजरी की किल्लत दूर करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अब सभी सरकारी निर्माण कार्यों में एम-सैंड का उपयोग 50% करना अनिवार्य होगा। पहले यह सीमा 25% थी। प्रदेश के खनिज भंडार को खोजने के लिए 37 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह काम मुख्य रूप से रेयर अर्थ एलिमेंट्स और आयरन ओर जैसे


