जंगल कर रहे वीरान:​रांची के जंगलों से सखुआ काट 30 हजार में बेच रहे तस्कर

संतोष चौधरी / प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट रांची पर प्रकृति पूरी तरह मेहरबान है। जल, जमीन और जंगल से परिपूर्ण रांची पर तस्करों की नजर टिक गई है। इसी का नतीजा है कि पहले बालू, पत्थर, मिट्टी को तस्करों ने बेच डाला। जमीन की लूट भी मची। सरकारी से लेकर आदिवासी जमीन को बेच दिया गया। प्रकृति का सबसे खूबसूरत तोहफा जंगल बचा है। स्वच्छ हवा और जीव-जंतु के जिंदा रहने के लिए जंगल का होना सबसे जरूरी भी है। लेकिन रांची के जंगलों पर भी तस्करों की नजर पड़ गई है। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिले के बुंडू, तमाड़, नामकुम, ओरमांझी, नगड़ी के जंगलों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। अब सबसे घने जंगल में शुमार चान्हो, मांडर और बुढ़मू की सीमा पर स्थित चोड़ा, चमरंगा, आनंदशिला, परसातरी, चामा भट्ठीगढ़ा, दादगो जंगल से पेड़ों की चोरी-छुपे कटाई हो रही है। सखुआ पेड़ से भरे इन जंगलों में एक पेड़ काटने पर करीब 3 हजार रुपए खर्च करके तस्कर उसे 30 हजार से अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। कुछ ग्रामीण और दबंग लोगों के सहयोग से पेड़ों की कटाई का पूरा सिंडिकेट चल रहा है। इसी का नतीजा है कि पिछले एक माह में इन जंगलों से सखुआ के करीब 300 पेड़ गायब हो गए। कभी हरा-भरा दिखने वाला जंगल अब वीरान होने लगा है। जहां दिन में भी जाने से ग्रामीण डरते थे, वहां अब समतल जमीन दिखने लगी है। हर तरफ कटे पेड़ों के ठूंठ दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत रेंजर से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि यही स्थिति रही तो जंगल के सभी पेड़ गायब हो जाएंगे। सखुआ का बोटा जितना मोटा… उतनी ऊंची कीमत मिलती है सखुआ के पेड़ की मोटाई तीन से पांच फीट तक है। जितना मोटा पेड़ होता है, उससे कमाई उतना अधिक होता है। एक पेड़ की लंबाई 10 से 18 फीट तक है। इसलिए तस्कर पुराने पेड़ों को काटने पर जोर दे रहे हैं। पतले पेड़ की कटाई पर करीब 2000 रुपए खर्च हो रहे हैं। वहीं मोटा पेड़ काटने पर करीब 3000 रुपए खर्च होते हैं। एक मोटे पेड़ से दस से अधिक खिड़की- दरवाजे निकलते हैं। एक सेट चौखट -खिड़की की बिक्री करीब 3 हजार रुपए में होती है। ऐसे में 25 से 30 हजार रुपए में एक पेड़ की बिक्री हो रही है। क्योंकि, पेड़ खरीदने वाले खिड़की- दरवाजा बनाने के बाद बची हुई लकड़ी भी जलावन के लिए बेच देते हैं। वर्षों से चल रहा पेड़ों की तस्करी का खेल चान्हो, मांडर व बुढ़मू के कुछ ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पहले कुछ तस्कर ही पेड़ों की कटाई करते थे। लेकिन अब बाहर के लोग आते हैं। पिकअप वैन में बोटा भरकर ले जाते हैं। कई बार साथ में हथियारबंद लोग भी रहते हैं। इस डर से गांव का कोई व्यक्ति आवाज नहीं उठाता। पेड़ काटे जाने की जानकारी पुलिस व वन विभाग के अधिकारियों को भी है, लेकिन किसी स्तर पर कार्रवाई नहीं होती। शिकायत मिली है, जांच का निर्देश दिया है
^बुढ़मू- चान्हो क्षेत्र के जंगल से पेड़ों की कटाई की सूचना मिली है। अवैध तरीके से पेड़ काट कर बेचने की शिकायत मिलने के बाद इस मामले की जांच का निर्देश दिया गया है। जल्द ही पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई होगी। हर हाल में जंगल में अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई जाएगी।
– श्रीकांत वर्मा, डीएफओ, रांची

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