भास्कर न्यूज | धालभूमगढ़ धालभूमगढ़ में प्रस्तावित एयरपोर्ट निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बुधवार को रुआशोल गांव में आयोजित ग्रामसभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और एक सुर में एयरपोर्ट निर्माण के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। सभा की अध्यक्षता ग्राम प्रधान लक्ष्मण हेंब्रम हेंब्रम ने की। ग्रामसभा का आयोजन आंचल कार्यालय के पत्रांक 291, दिनांक 17 अप्रैल 2025 के आलोक में किया गया था, जिसमें थाना प्रभारी मोहम्मद अमीर हमजा और बीडीओ बबली कुमारी भी मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को एयरपोर्ट के संभावित फायदे बताए गए, जैसे – क्षेत्रीय विकास, रोजगार के अवसर, बेहतर कनेक्टिविटी आदि। लेकिन ग्रामीणों की चिंता पर्यावरण और आजीविका को लेकर ज्यादा गंभीर थी। ग्रामीणों ने कहा- जंगल जीवन का आधार ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि एयरपोर्ट के लिए जंगलों की कटाई से उनका जीवन संकट में पड़ जाएगा। दातुन, पत्ता, लकड़ी, मशरूम जैसी प्राकृतिक संसाधन उनके जीवन यापन का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि जंगल समाप्त होने पर उनकी आजीविका, भोजन और पारंपरिक जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होगी। एक ग्रामीण ने कहा, “हमारे लिए जंगल सिर्फ पेड़ नहीं, जीवन है। हम उससे दातुन करते हैं, पत्तल बनाते हैं, मशरूम बेचते हैं। यह सब खत्म हो गया तो हम क्या खाएंगे, कहां जाएंगे?” विकास बनाम पारंपरिक जीवनशैली की टकराहट प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने ग्रामीणों को विकास के लाभ गिनाने की कोशिश की, लेकिन गांव वालों ने स्पष्ट कर दिया कि वे पर्यावरणीय नुकसान के बदले कोई सुविधा स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी अपील की कि प्रशासन बार-बार ग्रामसभा बुलाकर लोगों को परेशान न करे। इससे पहले 8 अप्रैल को देवसर गांव में भी ग्रामसभा हुई थी, जहां ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया था और प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। मौके पर प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी पीयूष कुमार मंडल, सीआई आलोक कुमार गुप्ता, पंचायत समिति सदस्य प्रदीप कुमार राय, मुखिया चित्तरंजन सिंह, पंचायत सचिव नवकुमार राय, एवं अन्य प्रशासनिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट को लेकर अब यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक स्थानीय आदिवासी समुदाय की सहमति नहीं मिलेगी, तब तक परियोजना पर आगे बढ़ना कठिन होगा। यह मुद्दा पर्यावरण संतुलन का भी है।


