जनता के लिए खर्च में कांग्रेस आगे, बीजेपी पिछड़ी:मावली में पुष्कर डांगी ने किया 97% बजट खर्च, वल्लभनगर के उदयलाल सबसे पीछे

उदयपुर और सलूंबर जिले के विधायकों के विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास (लेड) फंड खर्च पर नई जानकारी सामने आई है। जनता के विकास के लिए मिलने वाले फंड को खर्च करने के मामले में उदयपुर जिले के कांग्रेस के दोनों विधायक आगे रहे हैं, जबकि बीजेपी विधायकों की सुस्ती दिखी है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ताज़ा रिपोर्ट ने विकास के बड़े-बड़े दावों की हकीकत खोलकर रख दी है। मावली बनाम वल्लभनगर, विकास का बड़ा अंतर
​इस रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प मुकाबला मावली और वल्लभनगर के बीच है। ये दोनों विधानसभाएं एक-दूसरे की सीमाओं से सटी हुई हैं। एक तरफ मावली के कांग्रेस विधायक पुष्कर डांगी ने लगभग पूरा बजट (97%) मैदान में उतार दिया और 9.72 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। वहीं, दूसरी तरफ वल्लभनगर के बीजेपी विधायक उदयलाल डांगी का स्कोर कार्ड महज 31% पर अटका है। उन्होंने 123 काम प्रस्तावित किए थे, लेकिन मंजूरी सिर्फ 63 को मिली और खर्च सिर्फ 3.09 करोड़ ही हो पाया। ​कागजों में फंसा जनता का हक
​विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास (LED) फंड का सीधा इस्तेमाल गांव और शहरों की सड़कों, नाली निर्माण, सीसी रोड, स्कूलों में कमरों, पेयजल टंकी और लाइट जैसे जरूरी कामों के लिए होता है। अक्सर विधायक बहाना बनाते हैं कि ‘तकनीकी स्वीकृति’ मिलने में देरी हुई, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जो जनप्रतिनिधि लगातार फॉलोअप लेते हैं, उनके क्षेत्रों में फाइलें नहीं रुकतीं। खेरवाड़ा विधायक (कांग्रेस) डॉ. दयाराम परमार ने अपने सभी 57 कामों की मंजूरी लेकर काम शुरू करवा दिए, जो उनकी सक्रियता को दर्शाता है। विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA-LAD Fund) का इस्तेमाल मुख्य रूप से क्षेत्र की उन छोटी-बड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है, जिनसे आम आदमी का सीधा वास्ता पड़ता है। गली की नाली से लेकर स्कूल की छत तक, वो तमाम छोटे विकास कार्य जो नगर निगम या पंचायत के बजट में अटक जाते हैं, उन्हें विधायक इस फंड से करवा सकते हैं। जनता पर सीधा असर और सियासी समीकरण
​जब विधायक फंड खर्च नहीं करता, तो इसका सीधा खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ता है। फंड अटकने का मतलब है कि आपके मोहल्ले की खराब सड़क वैसी ही रहेगी या पीने के पानी की पाइपलाइन नहीं डलेगी। सलूंबर और गोगुंदा जैसे आदिवासी बाहुल्य इलाकों में पानी और सड़कों की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन वहां के विधायकों द्वारा बजट का पूरा इस्तेमाल न करना चिंता का विषय है। राजीनीतिक विश्लेषक डॉ मुनेश अरोड़ा का मानना है कि यह रिपोर्ट कार्ड अगले चुनावों का आधार बनेगा। कांग्रेस विधायकों का आगे रहना उनकी ‘प्रो-एक्टिव’ इमेज बना रहा है, जबकि बीजेपी विधायकों का पिछड़ना विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा दे गया है। अब देखना यह है कि वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले ये पिछड़े हुए माननीय अपनी फाइलों को कितनी तेजी से आगे बढ़ाते हैं, ताकि जनता का हक उन्हें समय पर मिल सके। किस विधायक ने अपने क्षेत्र में कितना काम करवाया है –

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