बासुदेव करण| बहरागोड़ा राज्य में काजू उत्पादन के क्षेत्र में पहचान बना चुका बहरागोड़ा वन क्षेत्र इन दिनों एक बार फिर उम्मीदों से भर गया है। यहां काजू के पेड़ों पर फूल आने शुरू हो गए हैं, जिससे इस वर्ष बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की संभावना जताई जा रही है। बहरागोड़ा वन क्षेत्र में लगभग 1200 हेक्टेयर वन भूमि पर काजू के बागान फैले हुए हैं। इसके अलावा रैयती भूमि पर भी बड़ी संख्या में काजू के पेड़ लगे हुए हैं। करीब 30 क्विंटल उत्पादन का अनुमान है। यहां से करोड़ों रुपए मूल्य के काजू का उत्पादन होता है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। जानकारी के अनुसार जनवरी और फरवरी में काजू के पेड़ फूलों से लद जाते हैं, जबकि मार्च और अप्रैल तक फल लगने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके बाद काजू बीज का संग्रह किया जाता है। काजू बीज संग्रह का कार्य मुख्य रूप से वन सुरक्षा समितियों द्वारा किया जाता है, जिससे सैकड़ों परिवारों को मौसमी रोजगार मिलता है। यदि बहरागोड़ा क्षेत्र में काजू प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना होती है, तो इसका सीधा लाभ स्थानीय किसानों और वन आश्रित परिवारों को मिलेगा। फिलहाल प्रोसेसिंग प्लांट नहीं होने के कारण यहां का कच्चा काजू औने-पौने दाम पर पश्चिम बंगाल भेज दिया जाता है, जहां उसका प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग होती है। ब्रांडिंग व पैकिंग से 10-25% अतिरिक्त मुनाफा संभव होगा। बहरागोड़ा क्षेत्र के काजू उत्पादक किसानों की समस्या को लेकर स्थानीय विधायक समीर मोहंती ने विधानसभा में काजू प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने का मुद्दा उठाया था। काजू के पेड़ों पर खिले फूल केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं, बल्कि बहरागोड़ा की आर्थिक उम्मीदों का संकेत हैं।


