छतरपुर जिले के लवकुशनगर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचमपुर में एक बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले को लेकर परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। गुरुवार को परिजन एसपी ऑफिस पहुंचे। परिजनों ने गांव की पंचायत और कुछ लोगों पर मानसिक प्रताड़ना, दबाव और सामाजिक बहिष्कार का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। क्या है पूरा मामला
मृतक गणेशा अहिरवार की पत्नी विद्या अहिरवार ने शिकायत में बताया कि उनके पति एक पुराने हत्या के मामले में जमानत पर रिहा हुए थे। इसके बाद 17 जनवरी 2026 को गांव के मंदिर में पंचायत बुलाई गई, जहां उन पर गंभीर आरोप लगाए गए। पंचायत में कथित तौर पर 3 से 4 लाख रुपये खर्च वाले धार्मिक अनुष्ठान कराने और पंचायत के फैसले मानने का दबाव बनाया गया। शर्तें न मानने पर परिवार को गांव से बाहर करने की धमकी भी दी गई। परिजनों का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे पंचायत की शर्तें पूरी नहीं कर सके। इसी लगातार मानसिक दबाव और चिंता के चलते 17 जनवरी की रात गणेशा अहिरवार की तबीयत बिगड़ गई और सदमे की हालत में उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मौत के बाद जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करा दिया गया, जिससे निष्पक्ष जांच की संभावना प्रभावित हुई। पंचायत ने हुक्का पानी बंद किया
मृतक के बेटे आशाराम अहिरवार ने 5 फरवरी को एसपी कार्यालय में आवेदन देकर बताया कि पिता की मौत के बाद भी पंचायत का दबाव खत्म नहीं हुआ है। परिवार पर सामाजिक प्रतिबंध लगा दिया गया है, हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है और गांव में कोई उनसे बातचीत तक नहीं कर रहा। आशाराम ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह का सामाजिक बहिष्कार कानूनन सही है और अपने परिवार को सुरक्षा व न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं, इस पूरे मामले में लवकुशनगर के एसडीओपी नवीन दुबे का कहना है कि यदि गांव या पंचायत ने किसी परिवार पर सामाजिक प्रतिबंध लगाया है, तो इसमें पुलिस क्या कर सकती है। पुलिस अधिकारी के इस बयान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि परिजनों का कहना है कि ऐसे माहौल में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


