यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में रखे गए 337 टन कचरे के पीथमपुर पहुंचने के बाद यूका की 85 एकड़ जमीन का क्या उपयोग होगा? कुछ लोग यहां कोई नया उद्योग स्थापित होने की संभावना जता रहे हैं तो एक सुझाव इस स्थान पर गैस त्रासदी का स्मारक बनाने का भी है। लेकिन नियमों की बात करें तो तत्काल इस जमीन का कोई उपयोग नहीं हो सकता। यूका फैक्टरी में जगह-जगह रासायनिक कचरा मौजूद है, इसलिए इस जमीन के उपयोग से पहले जमीन का भी ट्रीटमेंट करना होगा। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की गाइडलाइन के अनुसार इस जमीन के ट्रीटमेंट और इसे रासायनिक जहरीले कचरे से मुक्त घोषित करने के बाद ही इसका कोई उपयोग हो सकता है। सीपीसीबी ही इसकी प्रक्रिया तय करेगा। सीपीसीबी के वैज्ञानिकों के अनुसार अब खतरनाक अपशिष्ट वाली जमीन के ट्रीटमेंट के लिए ऐसी तकनीक मौजूद है जिसमें जमीन की खुदाई किए बिना इसका ट्रीटमेंट किया जा सकता है। ऐसे होगा प्रदूषित जमीन का ट्रीटमेंट
इस इन सिटू बायो रैमेडाइजेशन (आईएसबी) तकनीक में माइक्रो ऑर्गनाइज्स्म का उपयोग कर जमीन का ट्रीटमेंट किया जाता है। आईएसबी में पाइप के जरिए माइक्रो ऑर्गनाइज्म्स को जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। यह माइक्रो ऑर्गनाइज्स्म खतरनाक रसायन को नष्ट कर देते हैं। वैश्विक स्तर पर यह पद्धत्ति स्वीकार्य है। माइक्रो ऑर्गनाइज्म्स से साफ होगी मिट्टी
इसके पहले तक जमीन की खुदाई करके ट्रीटमेंट किया जाता था, लेकिन खुदाई करके निकलने वाली मिट्टी का निपटारा एक बड़ा और महंगा काम है। इसलिए आईएसबी तकनीक से ट्रीटमेंट होगा। हालांकि इस ट्रीटमेंट से पहले मिट्टी का फिर परीक्षण कर तय किया जाएगा कि इसके लिए किन माइक्रो ऑर्गनाइज्स्म का उपयोग होगा। भानपुर खंती की जमीन पर अब भी लगी है रोक
भानपुर खंती को नगर निगम ने 52 करोड़ खर्च करके साफ कराया। प्लान था कि 36.90 एकड़ में से 21 एकड़ जमीन जो खाली होगी वहां आईएसबीटी और मकान आदि बनाएंगे। लेकिन सीपीसीबी की गाइडलाइन के अनुसार इस तरह से रिक्लैन जमीन का 30 साल तक उपयोग नहीं किया जा सकता। अब यह जमीन खाली पड़ी है।


