साय सरकार में सुशासन का सबसे बड़ा कदम शनिवार को उठाया गया। 117 साल बाद एक्ट में बदलाव कर जमीन रजिस्ट्री में 10 नई व्यवस्थाएं लागू हो गई हैं। अब किसी को भी जमीन खरीदने के लिए पंजीयन कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। एक ही जमीन की दो बार रजिस्ट्री भी नहीं हो पाएगी। रजिस्ट्री होते ही ऑटोमोड में नामांतरण भी हो जाएगा। इसे लागू करने वाला छत्तीसगढ़ चौथा राज्य है। आंध्र, तमिलनाडु व तेलंगाना में ऐसी सुविधा मिल रही है। एक निजी होटल में इन सुविधाओं की शुरुआत सीएम विष्णुदेव साय ने बटन दबाकर की। उन्होंने कहा, ऑफलाइन व्यवस्था बंद करते हुए सरकार भ्रष्टाचार के रास्ते बंद कर रही है। कोयला, आबकारी सेक्टर में किए गए सुधारों की तर्ज पर भूमि पंजीयन की प्रक्रिया में रिफॉर्म किया गया है। वाणिज्यिक कर विभाग की सचिव अलरमेल मंगई डी. ने बताया किआटो डीड जनरेशन की सुविधा शुरू हो गई है। बता दें कि डेढ़ साल में पंजीयन के आईजी पुष्पेंद्र मीणा की टीम ने इस रिफॉर्म को तैयार किया है। किसने क्या कहा-
वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी: फर्जी रजिस्ट्री को शून्य करने का अधिकार पंजीयन महानिरीक्षक को दिया गया है। डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देते हुए सुगम एप के माध्यम से 2 लाख से अधिक संपत्तियों की जियो टैगिंग सुनिश्चित की गई है। इससे संपत्ति की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा: राजस्व और पंजीयन विभाग का यह संयुक्त प्रयास लोगों के लिए भूमि पंजीयन को नई दिशा देने का कार्य करेगा। राजस्व विभाग में 90 प्रतिशत प्रकरण नामांतरण के हैं। नई व्यवस्था के लागू होने से इन प्रकरणों की संख्या तेजी से कम होगी। हमारा विभाग लोगों को सुविधा देने के लिए संकल्पित है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन: रजिस्ट्री विभाग में आज लागू हुए नवीन सुधार सरलता, सुगमता और सुविधा की क्रांति के बारे में है। एक साथ लाखों लोगों को सुविधा देने का कार्य इन सुधारों से हो सकेगा। अधिकारियों के अधिकारों को कम करना एक बड़ा विजनरी काम है। उन्होंने कहा कि हमें इस कार्य को करने का अवसर मिला। यह जनता कि इज ऑफ लिविंग को बढ़ाने का कार्य है। बदलाव को ऐसे समझें -आधार लिंक से वास्तविक मालिकों की पहचान रहेगी, ऑनलाइन होने से घर बैठे ही लोग जमीन की सर्च कर सकेंगे आधार लिंक सुविधा
अभी तक: कई जगह किसी की संपत्ति कोई दूसरा बेच देता था। इससे वास्तविक मालिक की पहचान नहीं हो पाती थी।
अब: आधार लिंकिंग से बायोमेट्रिक से मालिक की पहचान आधार डेटा बेस से की जाएगी। वॉट्सएप मैसेज सर्विसेज
अभी तक: ऐसी सुविधा नहीं थी।
अब: पंजीयन प्रणाली में पक्षकारों को वॉट्सएप से नोटिफिकेशन मिलेगा। रजिस्ट्री की प्रगति और रजिस्ट्री होने की रियल-टाइम जानकारी मिलेगी। भारमुक्त प्रमाण पत्र
अभी तक: संपत्ति खरीदने से पहले क्रेता को यह पता करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती थी कि संपत्ति किसी अन्य को पूर्व में बेच तो नहीं दी गई।
अब: पक्षकार को अब ऑनलाइन सर्च के साथ ही भारमुक्त प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी कर दिया जाएगा। खुद से नामांतरण की सुविधा
अभी तक: संपत्ति के दस्तावेज रजिस्ट्री के बाद रिकॉर्ड में दर्ज कराने होते हैं। नामांतरण की कार्रवाई में पक्षकारों को लगभग 1 से 1 साल तक का समय लग जाता था।
अब: रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण भी हो जाएगा। घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा
अभी तक: कोई व्यवस्था नहीं थी।
अब: सरकारी संस्थाओं की जमीन या निर्माण की रजिस्ट्री ऑनलाइन करने की व्यवस्था थे। पारिवारिक दान, हक त्याग आदि में पंजीयन फीस मात्र 500 रुपए लिए जाने का प्रावधान है। कैशलेस पेमेंट की सुविधा
अभी तक: रजिस्ट्री ऑफिस में पंजीयन शुल्क का भुगतान चेक-कैश में होता था। पक्षकार को स्टाम्प ड्यूटी-पंजीयन फीस अलग-अलग देनी पड़ती थी।
अब: इंटीग्रेटेड कैशलेस पेमेंट सिस्टम से दोनों शुल्क का एकसाथ भुगतान हो सकेगा। भुगतान क्रेडिट-डेबिट कार्ड, पीओएस मशीन, नेट बैंकिंग या यूपीआई से कर सकेंगे। डिजी-लॉकर की सुविधा
अभी तक: शासन और निजी क्षेत्र की कई सेवाओं के लिए रजिस्ट्री पेपर की जरूरत होती थी।
अब: रजिस्ट्री दस्तावेजों को भारत सरकार के डिजी-लॉकर सुविधा से सुरक्षित स्टोर किया जा सकेगा। डिजी-लॉकर के माध्यम से इसका एक्सेस और नकल प्राप्त की जा सकेगी। ऑटो डीड जनरेशन की सुविधा
अभी तक: दस्तावेज बनाने, स्टांप खरीदने और पंजीयन के लिए अलग-अलग लोगों जैसे डीड राइटर, स्टांप वेंडर के चक्कर लगाने पड़ते थे।
अब: रजिस्ट्री को पेपरलेस बना दिया गया है। इस प्रक्रिया में विलेख प्रारूप (डीड) का चयन कर कंप्यूटर में एंट्री करने के दौरान दस्तावेज खुद तैयार हो जाते हैं। वहीं दस्तावेज उप पंजीयक को ऑनलाइन पेश होगा। रजिस्ट्री के बाद दस्तावेज खुद ही ऑनलाइन प्राप्त हो जाएगा। डिजी-डॉक्यूमेंट की सुविधा
अभी तक: कई ऐसे दस्तावेज होते हैं जिन्हें लगाए बगैर काम नहीं होता। शपथ पत्र, अनुबंध पत्र तैयार करने ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे।
अब: उक्त निराकरण के लिए डिजी-डॉक बनाया गया है। इससे लोग उपयोग में आने वाले दस्तावेज बना सकेंगे। इस सुविधा से डिजिटल स्टाम्प के साथ दस्तावेज तैयार जाता है। ऑनलाइन सर्च और डाउनलोड
अभी तक: रजिस्ट्री की जानकारी के लिए पंजीयन कार्यालय में स्वयं या वकील के जरिए पेश होकर सर्च करना पड़ता था।
अब: संपत्ति खरीदने से पूर्व उसकी जांच खुद कर सकेंगे। निर्धारित शुल्क का भुगतान कर खसरा नंबर से पूर्व की सभी रजिस्ट्री का ब्योरा देखा जा सकेगा। साथ ही उसकी कॉपी डाउनलोड की जा सकेगी। भास्कर इनसाइट – विरोध करने वाले 6 कर्मचारियों की फाइल बनाई और उन्हें चुप कराया अश्विनी पाण्डेय|रायपुर. वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया- ‘जब मुझे पंजीयन मंत्री बनाया गया तो मैंने कई लोगों से पूछा कि क्या बदलाव करना चाहिए। सबका कहना था कि पंजीयन में होने वाली दलाली को रोका जाए। आदमी जमीन को जिंदगी में एक-दो बार ही खरीदता है, जब वह रजिस्ट्री करवाए तो खुश हो। अभी कार्यालय के चक्कर और चढ़ावे से वह दुखी होकर ही लौटता है। इसके लिए डेढ़ साल पहले रजिस्ट्री डिजिटल करने का प्लान बनाया। कई लोग विरोध में थे। हड़ताल की धमकियां मिलने लगीं, क्योंकि कुछ ऐसे थे जिनकी ऊपरी कमाई बंद होने वाली थी। मैंने ऐसे लोगों की कुंडली निकलवाई। 6 कर्मचारियों की फाइल तैयार कर उन्हें बुलाया और कहा कि अगर रिफॉर्म को रोकेंगे तो ये फाइल एसीबी-ईओडब्ल्यू को सौंपेंगे। फिर वे शांत हुए। ऐसे लोगों को भी खोजा जो मुझे कमियां बता सकें। उनसे रात में 12 से 2 बजे तक मीटिंग की। उन्होंने एक-एक बिंदु बताया जहां जनता को दर्द का सामना करना पड़ता है। मैंने डिजिटलाइज करते समय इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखा। 500 दिन की मेहनत के बाद 1908 में बने एक्ट की 93 धाराओं में से 35 में संशोधन किए गए। पुराने एक्ट में गोद लिए पुत्र ही जमीन के हकदार होते थे, पुत्री का जिक्र ही नहीं था। ऐसे बिंदुओं को बदला गया।


