जयपुर के चांदपोल दरवाजे के पास एक बिल्डिंग की छत निर्माण को लेकर विवाद के बाद जयपुर नगर निगम ने इसे अभी कुछ समय के लिए रोक दिया है। निगम ने ही इसे बनाने की स्वीकृति दी और टेंडर किए थे। पुलिस की जांच में सामने आया है कि निर्माण की स्वीकृति देने के बाद नगर निगम ने मौके पर किसी तरह की जांच नहीं की। यही कारण रहा कि 5 मीटर के दायरे में निर्माण नहीं करने के आदेश का पालन नहीं हुआ। हंगामे के बाद अधिकारी हरकत में आए। अब निगम खुद के दिए आदेशों की जांच कर रहा है। जिम्मेदार बोले- ठेकेदार की गलती
जयपुर नगर निगम के एक्सईएन हेमराज ढाका ने बताया कि विधायक कोष से 20 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। इसके बाद निगम ने वर्क ऑर्डर जारी किया। ठेकेदार पिछले कुछ दिनों से इस पर काम कर रहा था। दो दिन पहले शटरिंग का काम शुरू हुआ। इस दौरान ठेकेदार ने सरिए हेरिटेज दीवार में डाल दिए, जो नियमानुसार गलत है। काम अभी रुका हुआ है। जांच के बाद आगे का निर्णय होगा। हाईकोर्ट में 2010 में दायर हुई थी पीआईएल
ब्रज मोहन जांगिड़ ने 2010 में पीआईएल दायर की थी कि परकोटे के आसपास हो रहे अतिक्रमण और निर्माण के कारण परकोटे की वॉल खराब हो रही है। हाईकोर्ट ने इसे सही मानते हुए जयपुर नगर निगम को वॉल के 5 मीटर के दायरे में निर्माण और अतिक्रमण नहीं होने के देने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों का पालन जिम्मेदार विभाग खुद ही नहीं कर रहा है। विधायक बोले- गुलाबी नगरी के स्वरूप को बिगाड़ने की चेष्टा
विधायक बालमुकुंद आचार्य ने बताया- कई हिंदू संगठनों ने मुझे मौके पर बुलाया। मैं वहां पहुंचा तो देखा कि 400 गज पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। जहां 4X4 का चबूतरा था, उसे 400 गज का किया जा रहा था। वो भी सरकारी पैसे से। कोर्ट का आदेश है कि 5 मीटर तक कोई निर्माण नहीं होगा। इसके बाद भी ये लोग वॉल तोड़ कर उसके अंदर सरिए डालकर पक्का निर्माण करने की कोशिश कर रहे थे। परकोटे का स्वरूप नहीं बिगड़ने दिया जाएगा। जयपुर नगर निगम के अधिकारी जिम्मेदार हैं। अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर नियम में आता है तो हम भी 5 मीटर हटा देंगे
मौलाना जफर मोहम्मद ने बताया कि चबूतरा बना हुआ था। टीन डली हुई थी। बरसात के कारण वह गिर गई। मरम्मत का काम करने की कोशिश की गई। विधायक अमीन कागजी ने कोटे से पैसा स्वीकृत करवा दिया। विधायक बालमुकुंद आचार्य ने हो-हल्ला करवा दिया। परकोटे के बराबर में 1 हजार निर्माण बने हुए हैं। उन पर एक्शन क्यों नहीं हो रहा? अगर रूल्स हैं तो हम भी 5 फीट सरका लेंगे। बने हुए को तोड़ देंगे। मैं केवल एक ट्रस्टी, मालिक नहीं हूं इस पैसे का
विधायक अमीन कागजी ने बताया कि यह तो सरकार का काम था। मैं तो केवल एक ट्रस्टी हूं। मालिक नहीं हूं। मैंने तो सैकड़ों जगह इस तरह से खर्चे करके निर्माण कराए हैं। महाराज से निवेदन है कि आप खुद के फायदे के लिए यह काम न करें। विधायक को निगम के अधिकारियों को बुलाकर पूछना चाहिए ये कैसे हुआ? इनको मौके पर आने की क्या जरूरत है? सरकार के संज्ञान में पूरा मामला है। कैसे होता है विधायक कोष से पैसा स्वीकृत
स्थानीय विधायक विधायक निधि से कार्य कराने के लिए अपने लेटर पर अनुशंसा करता है। यह पत्र जिला प्रशासन के पास जाता है। जिला प्रशासन संबंधित विभाग को पत्र लिख कर काम की डिटेल मांगता है। उस रिपोर्ट के अनुसार काम की लागत तय हो जाती है। जिला प्रशासन विधायक को कुल खर्च और विधायक कोष से जारी पैसे की जानकारी देता है। विधायक की स्वीकृति मिलने पर काम संबंधित विभाग को दे दिया जाता है। संबंधित विभाग टेंडर करके काम की शुरुआत करवाता है। रिपोर्ट पर पुलिस कर रही जांच
एडिशनल डीसीपी नॉर्थ बजरंग सिंह शेखावत ने बताया कि विधायक अमीन कागजी की ओर से एक रिपोर्ट दी गई है, जिसकी जांच की जा रही है। पूरा मामला निगम से संबंधित है। निर्माण के काम की स्वीकृति और टेंडर निगम ने दिए थे। वही अब इस की जांच कर रहे हैं। ——————————— जयपुर के परकोटे में विवाद की यह खबर भी पढ़िए… जयपुर के परकोटे में निर्माण पर दो विधायक भिड़े:बालमुकुंदाचार्य ने कहा-दीवार तोड़कर हो रहा अतिक्रमण, कागजी बोले- शर्म नहीं आती क्या महाराज? जयपुर में एक बिल्डिंग की छत निर्माण को लेकर दो विधायक भी आमने-सामने हो गए। विधायक बालमुंकुदाचार्य ने कहा- पुरातत्व को बचाओ। अजमेरी गेट-घाटगेट पर अवैध निर्माण हो रहे हैं। यहां चांदपोल में बिल्डिंग एक समान रंग में नहीं हैं। पढ़ें पूरी खबर…


