जगतपुरा महल रोड स्थित 11-रामचंद्रपुरा में जनकल्याण संस्थान के भवन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर में राम परिवार की प्राण प्रतिष्ठा के साथ-साथ विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। प्रांत के धर्मजागरण प्रमुख अमरसिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भगवान श्रीराम की मूर्तियों की स्थापना की गई। इसके बाद फाल्गुन कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को अभिजीत मुहूर्त में वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ हवन-यज्ञ कर मूर्तियों की विधिवत प्रतिष्ठा संपन्न हुई। यह आयोजन 1008 अवधेश देवाचार्य महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी एवं धर्म जागरण प्रमुख शरद राव डोले के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ विराट हिंदू सम्मेलन की शुरुआत भारत माता के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई। “वसुधैव कुटुंबकम की भावना से समाज मजबूत होगा” – सुरेश सोनी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने हिंदू समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि समाज वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ संयुक्त परिवार में रहेगा, तो सब कुछ अच्छा रहेगा। उन्होंने कहा कि देह का महत्व तभी तक है, जब तक उसमें आत्मा है। आत्मा निकल जाने के बाद शरीर का कोई मूल्य नहीं रहता। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम से मिलने से पहले वानर, भालू और रीछ समाज बिखरा हुआ था, लेकिन राम से जुड़ने के बाद उन्हें जीवन की नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए संगठित रहना अत्यंत आवश्यक है। भगवान श्रीराम ने रीछ-वानरों को संगठित कर रावण जैसी बड़ी शक्ति को पराजित किया और बिना अयोध्या से सेना बुलाए लंका पर विजय प्राप्त की। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि हिंदू के नाते सोचें, व्यवहार करें और आपसी प्रेम व सौहार्द बनाए रखें। बड़ी संख्या में गणमान्य लोग रहे उपस्थित कार्यक्रम में क्षेत्रीय संघचालक रमेश चंद्र, क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम, प्रांत प्रचारक बाबूलाल, जयपुर प्रांत के दुर्गादास, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्याम कुमार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन के संस्थान अध्यक्ष बाबूलाल सहित अनेक पदाधिकारी, संतगण एवं समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक एकता का संदेश दिया। आयोजन का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार और संगठन की भावना को सशक्त करना रहा।


