राज्य सरकार ने उन कर्मचारियों के परिजनों को बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है, जो ड्यूटी के दौरान बीमारी के कारण स्थायी रूप से पूर्ण दिव्यांग हो जाने पर नौकरी करने में सक्षम नहीं रहते। सरकार ने घोषणा की है कि ऐसे कर्मचारियों के पात्र आश्रितों को भी अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकेगी। विधानसभा में मंगलवार को नोहर विधायक अमित चाचाण ने 11 साल से कोमा में चल रहे हनुमानगढ़ जिले के ललाना निवासी कांस्टेबल सुभाष चंद्र के परिवार को अनुकंपा नियुक्ति देने का मामला ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के जरिए उठाया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यह मानवीय मूल्यों से जुड़ा विषय है और सरकार ऐसे मामलों में राहत देने का प्रयास करेगी। मंत्री पटेल ने बताया कि नियम 2023 के बिंदु संख्या 2 के अनुसार पहले केवल ड्यूटी के दौरान दुर्घटना से स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में ही अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान था, जबकि कांस्टेबल सुभाष चंद्र की दिव्यांगता बीमारी के कारण उत्पन्न हुई थी। इसी कारण पहले नियुक्ति संभव नहीं हो पा रही थी। हालांकि, हालिया बजट संशोधन के बाद बीमारी के कारण पूर्ण दिव्यांग होने के मामलों में भी नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सुभाष चंद्र के मामले में विभागीय निर्देशानुसार जल्द कार्यवाही कर परिवार को राहत प्रदान की जाएगी। 11 साल बाद सुभाष के परिवार को मरहम नोहर विधायक अमित चाचाण ने विधानसभा में सरकार से मांग की कि ‘राजस्थान स्थायी पूर्ण दिव्यांग सरकारी कर्मचारी के आश्रितों की अनुकम्पात्मक नियुक्ति नियम-2023’ के बिंदु संख्या 14 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए पुत्र राहुल कड़वासरा को कनिष्ठ सहायक पद पर नियुक्ति दी जाए। ये कांस्टेबल सुभाष चंद्र हैं। सबकुछ अच्छा चल रहा था। साल 2015 में चुनाव में ड्यूटी के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर गए। 11 साल हो गए। सुभाष अभी भी कोमा में हैं। अंग काम नहीं कर रहे हैं। वे स्थायी दिव्यांग हो चुके हैं। सुभाष परिवार में अकेले कमाने वाले थे। उनके बीमार पड़ने से परिवार इन दिनों घोर आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है। (सरकारी नियमों के अनुसार बीमार होने पर भी एक निश्चित समय तक ही वेतन मिलता है) विधायक अमित चाचाण के मुताबकि, सुभाष के बेटे राहुल कड़वासरा ने कनिष्ठ सहायक के लिए आवेदन किया था लेकिन विभाग में खारिज कर दिया। जबकि सीएमएचओ की ओर से जारी प्रमाण पत्र में सुभाष चंद्र को स्थायी पूर्ण दिव्यांग घोषित किया गया है। ऐसे में उनके एक आश्रित को तत्काल सरकारी नौकरी दी जाए। 7 साल से सदन में उठ रहा मामला
विधायक चाचाण ने बताया कि वे पिछले 7 वर्षों से यह मामला लगातार उठा रहे हैं। वर्ष 2023 में उनकी मांग के बाद अनुकंपा नियुक्ति में शिथिलता दी गई थी, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हो पाई। उनका कहना है कि परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है, जिससे रोजी-रोटी का संकट बना हुआ है। बजट घोषणा में भी छूट दी गई
मंत्री ने बताया कि बजट 2026-27 में सरकार ने घोषणा की है कि राजकीय सेवा में रहते हुए यदि कर्मचारी को ऐसी डिसएबिलिटी हो जाती है, जिसके कारण वह राजकार्य करने में सक्षम नहीं रहता, तो उसके पात्र आश्रित को भी अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। पहले यह प्रावधान केवल ड्यूटी के दौरान दुर्घटना से स्थायी डिसएबिलिटी के मामलों तक सीमित था।


