जर्जर स्कूलों पर हाईकोर्ट की सरकार को चेतावनी:मार्च में बजट लैप्स हो रहा; स्कूलों के हालत नहीं सुधरे तो जुलाई के बाद नया निर्माण रोक देंगे

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश के सरकारी जर्जर स्कूल भवनों के मामले में राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इनकी हालत नहीं सुधरी तो आगामी जुलाई के बाद हॉस्पिटल व स्कूल बिल्डिंग बनाने की इजाज़त ही देंगे.. किसी भी नए कंस्ट्रक्शन को रोक देंगे। यह देखना कोर्ट की ड्यूटी नहीं है कि राज्य को पैसा कहां से मिलेगा, इसका इंतज़ाम राज्य को करना है और यह जरूरी है। मार्च में बजट लैप्स हो रहा है। सरकार सिर्फ टेंडर कर रही है। खंडपीठ ने कहा कि रालसा से रिपोर्ट है कि भरतपुर में 20 साल पुरानी बिल्डिंग गिरी थी उसमें दरारें थीं। दरार आंधी-तूफान से आई, यह अच्छी तस्वीर नहीं है। झालावाड़ में जर्जर स्कूल की घटना से जुड़ी पीआईएल में शिक्षा सचिव ने हलफनामा दायर कर कहा कि कोई भी पुरानी बिल्डिंग इस्तेमाल नहीं की जा रही है, फिर भी कई घटनाएं हुई हैं जिनमें बिल्डिंग या छतें गिर गिरी हैं। खंडपीठ ने यह टिप्पणी सरकारी जर्जर स्कूलों पर लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए की। वहीं, खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे आगामी सुनवाई 19 मार्च को शपथ पत्र के जरिए बताएं कि प्रदेश में स्कूल बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन और रिपेयर का क्या रोडमैप रहेगा। जस्टिस महेन्द्र गोयल व जस्टिस अशोक कुमार जैन ने यह निर्देश स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में दिया। खंडपीठ ने कहा कि बूंदी के एक स्कूल की छत गिर गई और वहां बैठे 30 छात्र कुछ मिनट पहले ही वहां से गए थे। डीएलएसए की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे अभी भी गंदी जगहों पर पढ़ रहे हैं। सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना स्कूल भवन का इस्तेमाल नहीं खंडपीठ ने एजी से पूछा कि छह महीने में क्या कार्रवाई की? एजी ने कहा कि पालना रिपोर्ट पेश की है। खंडपीठ ने कहा कि सरकार की रिपोर्ट दिखावा है। बच्चों को सेफ रखने के लिए ठोस कदम उठाएं। स्कूल के लिए जरूरी सेफ्टी चेक होना चाहिए। अगर सर्टिफिकेट नहीं है तो बिल्डिंग इस्तेमाल नहीं की जाएगी। डीईओ के फाइनेंशियल ईयर के एफिडेविट के अनुसार, 2026-27 के लिए नए और पुराने स्कूलों के कंस्ट्रक्शन और रिपेयर के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रपोजल है। लेकिन यह बजट बहुत कम है। मंदिर में लोग 600 करोड़ दान कर सकते हैं, एजुकेशन में नहीं? ऐसा इसलिए.. क्योंकि यहां ट्रांसपेरेंसी ही नहीं जस्टिस गोयल एजी से… फ्लेक्स बैनर लगा रहे हैं। ग्लॉसी पेपर पर पैम्फलेट छपवा रहे हैं, वह भी इंग्लिश में। आपके पास इस पर खर्च करने के लिए पैसा है जिसकी गांवों में जीरो यूटिलिटी है। फंड को ट्रांसपेरेंट बनाएं, आपने क्या किया है? एजी राजेन्द्र प्रसाद.. प्रपोज़ल लेवल पर एक कमेटी बनाने के लिए एजुकेशन डिपार्टमेंट को भेजा गया है। जस्टिस जैन… आईएएस ऑफिसर ही क्यों, जज या एजुकेशनिस्ट क्यों नहीं! मंदिर में लोग 600 करोड़ दान कर सकते हैं, एजुकेशन में नहीं? ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां पर कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं है। अगर मंदिर में हो सकते हैं 1 महीने में 600 करोड़ तो आप क्यों नहीं कर सकते? स्कूल की बिल्डिंग 2 फ्लोर तक होनी चाहिए और फ्लोर के बीच सही फेंसिंग होनी चाहिए। कोई खुली जगह नहीं होनी चाहिए ताकि कोई गिर न सके और कोई किसी को धक्का न दे सके। प्री प्राइमरी क्लास सिर्फ ग्राउंड फ्लोर पर होनी चाहिए।

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