छिंदवाड़ा में उच्च शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और हाल ही में जारी हुए परीक्षा परिणामों को लेकर जिले के छात्र-छात्राओं में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) जिला छिंदवाड़ा ने इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। आरोप लगाया है कि जल्दबाजी और स्टाफ की कमी के चलते प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम संदेह के घेरे में हैं, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। एनएसयूआई की मध्य प्रदेश की महासचिव अपेक्षा सूर्यवंशी का कहना है कि कई ऐसे छात्र-छात्राएं, जिन्होंने 10वीं और 12वीं कक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होकर महाविद्यालय में प्रवेश लिया, उन्हें प्रथम वर्ष की परीक्षा में सप्लीमेंट्री आना समझ से परे है। संगठन ने आरोप लगाया कि कॉपियों की जांच में एकरूप अंक दिए जा रहे हैं, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है और विद्यार्थियों का परीक्षा परिणामों पर विश्वास लगभग समाप्त हो गया है। पीजी कॉलेज के NSUI अध्यक्ष अर्पित तिवारी ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के नियमों के तहत छात्र-छात्राएं प्रमोशन शुल्क जमा कर द्वितीय वर्ष में प्रवेश ले लेते हैं। इस दौरान उनसे नियमित फीस के साथ प्रोजेक्ट कार्य भी जमा कराया जाता है, लेकिन सप्लीमेंट्री के कारण अब वे द्वितीय वर्ष की परीक्षा देने को लेकर असमंजस में हैं। एनएसयूआई ने मांग की है कि या तो सप्लीमेंट्री परीक्षा द्वितीय वर्ष की परीक्षा से पूर्व आयोजित कराई जाए, अथवा ऐसे छात्र-छात्राओं को द्वितीय वर्ष की परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति दी जाए, ताकि उनका एक वर्ष बर्बाद होने से बच सके। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो छात्रहित में उग्र आंदोलन किया जाएगा।


