मुनेश्वर साहु| सिसई सिसई के 18 पंचायत के 88 गांवों में नदी, तालाब, कुआं व चापानल सुखने लगा है। जगह-जगह पर जलमीनार खराब हो गया है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर घर जल नल योजना भी विफल साबित हो रहा है। जिसके वजह से प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों में लोग आज भी शुद्ध पानी पीने के लिए तरस रहे हैं। पेयजल आपूर्ति योजनाएं फाइलों पर ही धरी के धरी रह गई है। भीषण गर्मी के कारण अधिकतर जलस्रोत सुख चुके हैं। जो नहीं सूखे हैं वहां भी जलस्तर काफी नीचे चला गया है। वहीं चापानलों का हाल भी बेहाल हो गया है। जिसके वजह से प्रखंड के ग्रामीणों को एक घड़ा पानी लेने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है जब जाकर पानी नसीब होता है। सिसई प्रखंड की आबादी लगभग डेढ़ लाख के आसपास है। जहां प्रखंड की पूरी आबादी की प्यास बुझाने के लिए 2228 चापानल लगाया गया है। इनमें से आधे से अधिक चापानल खराब पड़े है। हांलाकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 218 चापानल पूरी तरह से खराब हो चुके है। वहीं 91 चापानल से गंदा पानी निकलता है और 420 चापानलों को मरम्मत की जरुरत है। लोगों का कहना है कि चापानल में बमुश्किल से 10 से 15 बाल्टी ही पानी निकलता है।


