पीएचई ने 3200 करोड़ रु. मांगे थे; बैठक में अफसर बोले- खुद ही प्रबंध करें जल जीवन मिशन में गड़बड़ियों को लेकर पिछले दिनों विधानसभा में हंगामा हुआ। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने योजना की जांच की मांग की थी। अब सामने आया है कि जिन गांवों तक पानी नहीं पहुंचा, उनके लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) ने पुनरीक्षित योजना बनाई है। इसके लिए 3200 करोड़ का बजट मांगा गया था, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया है। दरअसल, मप्र के 6500 गांवों में हर घर तक ‘नल से जल’ योजना अधर में लटक गई है। केंद्र पहले ही इस योजना के लिए 8957.50 करोड़ रु. दे चुका है। ऐसे में पीएचई के अफसरों ने पुनरीक्षित योजना का प्रस्ताव 13 नवंबर को सीएस के सामने रखा था। पीएचई के अफसरों ने बताया कि 27,150 गांवों में योजना की लागत 17,911 करोड़ रु. है। सूत्रों का कहना है कि बैठक में पीएचई को बजट का प्रबंध खुद करने को कहा गया है। शेष | पेज 16 पर सूख गए ट्यूबवेल, सर्वे भी गलत हुआ
पीएचई के प्रेजेंटेशन में ट्यूबवेल सूखने का मुद्दा उठाया गया है। योजना में सभी गांवों के मजरे-टोले शामिल नहीं हो सके, क्योंकि ट्यूबवेल खोदते समय भू-जल स्तर का सही आंकलन नहीं किया गया और सर्वे में सभी मजरे-टोले शामिल नहीं थे। पानी की कमी या स्रोत गांव से दूर होने के कारण नए नलकूप बनाने की आवश्यकता पड़ी। प्रोजेक्ट पूरा न हो पाने की ये 3 वजह योजना के इन कामों पर भी खर्च करने पड़ेगी बड़ी रकम सही सर्वे न करने वालों पर क्या कार्रवाई की : सीएस 5,546 योजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है पुनरीक्षित योजना में 6500 गांवों के लिए 3200 करोड़ और चाहिए। इनमें से 5546 योजनाओं की डीपीआर तैयार है। पुनरीक्षण से मप्र के गांवों में रहने वाले 10 लाख परिवारों को फायदा होगा। इनमें अजा के 90 हजार और अजजा के 1.6 लाख परिवार शामिल हैं। वित्त का विकल्प तलाशने के लिए बनाई गई कमेटी हमें पुन: परीक्षण करने और वित्त की व्यवस्था के लिए विकल्प तलाशने के लिए कहा गया है। इसके लिए 17 दिसंबर को ही चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में कमेटी बनाई है, जो पुन: परीक्षण कर 15 दिन में रिपोर्ट देगी। यदि वित्त पोषण नहीं मिलता है तो शासन स्तर पर पुनरीक्षण बजट देने पर विचार होगा। – पी. नरहरि, सचिव पीएचई


