जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले की परतें बीकानेर में भी जमीं हुई है। नोखा और खाजूवाला में लाखों रुपए का ज्यादा भुगतान उठाने के आरोपों की जांच में तेजी आई है। राज्य सरकार ने पीएचईडी के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश में 979 करोड़ के जेजेएम घोटाले में एसीबी की कार्यवाही होने से बीकानेर में भी हड़कंप मचा हुआ है। नोखा और खाजूवाला में पेयजल सप्लाई की लाइनें बिछाने, ओवरहेड टैंकों के निर्माण में गड़बड़ियों की शिकायत राज्य सरकार से की गई थी। आरोप है कि एक ट्रेंच में दो या तीन पाइप लाइन बिछाई गई और भुगतान सेपरेट लाइनों का उठाया गया। करीब 80 ओवरहेड टैकों में रूम नहीं बनाए गए। वर्ष 2024 में काम पूरा होना था, अभी तक 70-80 प्रतिशत ही काम हुआ है। नोखा और खाजूवाला के कार्यों में लाखों रुपए का ज्यादा भुगतान उठाने के आरोप फर्म पर लगाए गए हैं। सौ से ज्यादा फोटो जीपीएस लोकेशन के साथ शिकायत हुई, मगर प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की मिली भगत से राजकोष को भारी हानि पहुंचाई गई है। इस मामले में अधीक्षण अभियंता सुभाष नेहरा के नेतृत्व में गठित दल ने नोखा और खाजूवाला का फील्ड सर्वे कर भुगतान में अनियमितताओं को देखते हुए रिकॉर्ड की जांच की है। क्या है आरोप प्रोजेक्ट की जांच के लिए दो बार बनाई कमेटी जेजेएम में घोटालों को लेकर शिकायतों का अंबार लगने से पीएचईडी के अधिकारियों के बीच समन्वय गड़बड़ा गया। नोखा और खाजूवाला में फर्म ओम इंफ्रा लिमिटेड द्वारा नियम विरुद्ध भुगतान उठाने के आरोपों की जांच के लिए दो बार कमेटी बना दी गई। पीएचईडी के मुख्य अभियंता एवं अतिरिक्त सचिव संदीप शर्मा ने एसई सुपार्श्व कुमार जैन, एक्सईएन उमेश कुमार मीणा और सहायक लेखाधिकारी पवन कुमार शर्मा को जनवरी में जांच सौंपी थी। इस दौरान पता चला कि क्वालिटी कंट्रोल के चीफ इंजीनियर आरके मीणा पहले ही एक कमेटी बना चुके हैं। बाद में इन्हीं की कमेटी रखी गई। बता दें शिकायकर्ता एडवोकेट टीएम शर्मा ने जेजेएम में 979 करोड़ के घोटाले को लेकर 2024 में एसीबी में एक परिवाद दिया था, जिस पर वर्तमान में कार्यवाही चल रही है।


