जल संकट : कृषि और पीने के पानी की समस्या गहराई

भास्कर न्यूज| जैंतगढ़ ओडिशा के क्योंझर जिले में निर्माणाधीन कानपुर सिंचाई परियोजना में पानी रोके जाने से वैतरणी नदी का प्रवाह रुक गया है। जिससे नदी के निचले इलाके में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। नदी तालाब की तरह हो गई है। अधिकांश हिस्से में सिर्फ बालू ही रह गया है। जहां गड्ढे हैं, वहीं पानी जमा हुआ है। डैम में डेप्लिशन स्विच की कमी के कारण पानी को रोके जाने से चंपुआ, जैंतगढ़, तुरुमुंगा और आनंदपुर जैसे क्षेत्रों में कृषि और पीने के पानी की समस्या विकराल हो गई है। क्योंझर जिले के जोड़ा ब्लॉक के कानपुर के पास नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में एक विशाल बांध परियोजना 1968 में शुरू की गई थी। इसका निर्माण कार्य 1980 में शुरू हुआ था और अब यह अपने अंतिम चरण में है। जहां एक ओर किसानों में कृषि कार्य बाधित होने से भारी असंतोष है, वहीं जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल), टाटा स्टील और बीआरपीएल सहित नदी से पानी लेने वाले कई उद्योगों को परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की कमी के कारण कुछ उद्योगों ने जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए खुद की पाइपलाइन बिछाना शुरू कर दिया है। जलापूर्ति केंद्रों के इंटेक वेल में समुचित रूप से जल संग्रह नहीं हो पाता है। जिससे जलापूर्ति भी बाधित हो रही है। अगर यही हाल रहा तो जलापूर्ति भी ठप होने की संभावना बन सकती है। कानपुर सिंचाई परियोजना के वरिष्ठ अभियंता प्रसाद रंजन पांडा ने बताया कि 1980 के दशक की एक तकनीकी खामी के कारण आज यह समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। उन्होंने बताया कि नदी के जल का उचित संरक्षण नहीं किया गया और बांध निर्माण के दौरान महत्वपूर्ण स्थानों पर जल निकासी नियंत्रण स्विच नहीं लगाए गए। उन्होंने कहा कि इसी कारण अब बांध में जल स्तर बनाए रखने के लिए इन नियंत्रण स्विचों को लगाने का प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नदी में पानी का प्रवाह नहीं हो रहा है। पांडा ने कहा कि मानसून शुरू होने के बाद जून तक बांध के नहर द्वार खोल दिए जाएंगे। जिससे नदी में भारी मात्रा में पानी का प्रवाह संभव हो सकेगा। इस बीच, चंपुआ के सब-कलेक्टर उमाकांत परिदा ने स्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने किसानों के खेतों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया। ब्लॉक कृषि अधिकारी सरदा हांसदा और सहायक कृषि अधिकारी राममणि साहू के साथ वर्तमान स्थिति से निपटने के तरीकों पर चर्चा की।

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