मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीला कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बीमार दो और बच्चों ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। दोनों नागपुर में भर्ती थे। इस तरह सिरप से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 19 हो गया। हैरानी की बात है कि इतनी मौतों के बाद भी सिरप बनाने वाली कंपनियां बेखौफ हैं। बच्चों की मौतों के चलते इंदौर की दवा कंपनी एआरसी फार्मास्युटिकल्स जांच की जद में आई। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) के निर्देश पर केंद्र और राज्य की टीमों ने कंपनी का रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन किया। भास्कर को मिली इसकी 89 पेज की रिपोर्ट में कई चौंकानें वाले जानकारियां हैं। रिपोर्ट में कंपनी में मिलीं 216 खामियों का जिक्र हैं। इनमें 23 क्रिटिकल हैं। इनमें बताया गया है कि यहां फंगस वाले पानी से सिरप बनाकर प्लास्टिक के गंदे डिब्बों में रखा गया था। फिर इसे गंदे और बदबूदार कपड़ों से छानकर बोतलों में भरा जा रहा था। जिस डायएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा में गड़बड़ी से बच्चों की मौत हुई थी, उसे जांचने की प्रक्रिया कंपनी के पास नहीं मिली। कंपनी के पास तैयार फॉर्मुलेशन में इन दोनों की अशुद्धियों की जांच का भी कोई इंतजाम नहीं है। दवाओं के स्टोरेज के लिए तय तापमान भी मेंटेन नहीं मिला। यह इंस्पेक्शन तीन दिन चला। बता दें कि एआरसी कंपनी में बना सिरप डिफ्रॉस्ट भी छिंदवाड़ा की दवा दुकान से जब्त किया था। इसके बाद 27 से 29 सितंबर के बीच पांच सदस्यीय टीम ने कंपनी में जांच की थी और यहां सिरप उत्पादन तत्काल रोक दिया था। क्या-क्या मिला… गैस स्टोव पर बन रही थी चाशनी गंदे ड्रम में था सिरप सस्पेंशन फंगस वाला सिरप तो जानलेवा ही होगा… दवा बनाने वाली किसी फैक्ट्री में यदि 216 खामियां हैं, जिसमें 23 अति गंभीर और 150 से अधिक गंभीर हैं, तो उस फैक्ट्री की कमियों को जब तक दूर नहीं किया जाता, तब तक कंपनी को दवा निर्माण की अनुमति नहीं होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में किए गए उत्पादन की गुणवत्ता पर सदैव संदेह रहेगा। यदि फंगस वाले पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है तो निश्चित ही दवा खराब होगी। दवा कंपनियां के लिए सरकार द्वारा लागू किए गए शेड्यूल एम का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है। कंपनियों को उत्पादन के साथ ही अपने यहां आने वाले रॉ मटेरियल की भी पूरी टेस्टिंग करनी चाहिए, वहीं बड़ी चूक होती है। नरेंद्र आहूजापूर्व स्टेट ड्रग कंट्रोलर, हरियाणा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा केस: कफ सिरप से मौतों का केस मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका दायर कर सीबीआई जांच कराने और दवा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की।


